अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान पर बोले ओवैसी- अगर वह ये समझते हैं कि मुसलमान.....
दिल्ली, 1 नवंबर: ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मोहम्मद अली जिन्ना पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर जोरदार हमला बोला है। हैदराबाद के सांसद ने कहा है कि उन्हें अपना सलाहकार बदल लेना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिलने वाला। ओवैसी ने यहां तक कहा है कि अखिलेश यादव को खुद भी थोड़ा पढ़ना चाहिए और इतिहास जानना चाहिए। गौरतलब है कि सपा सुप्रीमो ने पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना की तुलना सरदार पटेल, महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू तक से कर दी है, जिसको लेकर भाजपा और बसपा भी उनके खिलाफ जोरदार हमले कर रही है। मायावती ने उनके बयान को सपा-भाजपा की मिलीभगत बताया है।

खुद को शिक्षित करें अखिलेश यादव- ओवैसी
हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी को अखिलेश यादव का जिन्ना को लेकर दिया गया बयान नागवार गुजरा है। ओवैसी ने कहा है कि 'अखिलेश यादव को समझना चाहिए कि भारतीय मुसलमानों को मोहम्मद अली जिन्ना से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे बुजुर्गों ने दो राष्ट्र के सिद्धांत को ठुकरा दिया था और भारत को अपना मुल्क चुना।' यही नहीं एआईएमआईएम चीफ ने सपा प्रमुख को अपना ज्ञान बढ़ाने की भी सलाह दे डाली है। उनके मुताबिक, 'अगर अखिलेश यादव सोचते हैं कि इस तरह का बयान देने से वह एक वर्ग को खुश कर सकते हैं, तो मैं समझता हूं कि वह गलत हैं और उन्हें अपने सलाहकारों को बदल देना चाहिए। उन्हें खुद को भी शिक्षित करना चाहिए और थोड़ा-बहुत इतिहास पढ़ना चाहिए।'

'विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर से सामने आई'
गौरतलब है कि भाजपा अखिलेश यादव के इस बयान पर पहले से ही हमलावर है। खुद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके इस बयान को शर्मनाक बताया है और कहा है कि विभाजनकारी मानसिकता फिर से सामने आ गई है। योगी ने कहा है, "वह देश तोड़ने वाले जिन्ना की तुलना देश जोड़ने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल से कर रहे थे, जो एकदम शर्मनाक है......विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर से सामने आ गई जब उन्होंने सरदार पटेल को जिन्ना के समकक्ष रखकर के जिन्ना को महिमामंडित करने का प्रयास किया है। भारत की जनता और खासकर उत्तर प्रदेश की जनता इसे हरगिज स्वीकार नहीं करेगी।"
अखिलेश यादव ने महानायकों से की थी जिन्ना की तुलना
दरअसल, रविवार को देश के पहले उप प्रधानमंत्री और पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती थी। लेकिन, एक कार्यक्रम में ऐसे मौके पर अखिलेश यादव ने देश के आजादी के महानायकों को पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना के साथ एक पाले में रख दिया। उन्होंने कहा, "सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और (मोहम्मद अली) जिन्ना ने एक ही संस्था में पढ़ाई की। वे सब बैरिस्टर बने और भारत की आजादी के लिए लड़े.....वह लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल थे, जिन्होंने एक विचारधारा (आरएएस) पर बैन लगाया था।"

सपा-भाजपा की मिलीभगत-मायावती
उधर अखिलेश यादव के इस बयान के लिए बीएसपी ने भी उनपर हमला बोला है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट करके कहा है कि सपा और भाजपा के बीच साठगांठ है। उन्होंने दो ट्वीट में लिखा है, "सपा मुखिया का जिन्ना को लेकर कल हरदोई में दिया गया बयान और उसपर भाजपा की प्रतिक्रिया दोनों पार्टियों की अन्दरुनी मिलीभगत और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि यहां यूपी विधानसभा आम चुनाव में माहौल को किसी भी प्रकार से हिन्दू-मुस्लिम करके खराब किया जाए।....... ...सपा और भाजपा की राजनीति एक-दूसरे की पोषक और पूरक रही है। इन दोनों पार्टियों की सोच जातिवादी और साम्प्रदायिक होने के कारण इनका अस्तित्व एक-दूसरे पर आधारित रहा है। इसी कारण सपा जब सत्ता में होती है तो भाजपा मजबूत होती है, जबकि बीएसपी जब सत्ता में रहती है तो भाजपा कमजोर।"












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