केजरीवाल ने लिखा एलजी को खत, कहा- या तो सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला मानिए या बिल्कुल नहीं
नई दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उप-राज्यपाल अनिल बैजल को सोमवार को पत्र लिखा है। इस पत्र में केजरीवाल ने हैरान जताई है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चयनात्मक कैसे हो सकते हैं। अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जस का तस लागू करने की दरख्वास्त की है। साथ ही केजरीवाल का कहना है कि गृहमंत्रालय के पास आदेश की व्याख्या करने का अधिकार नहीं है।

अरविंद केजरीवाल ने अपने खत में लिखा कि, आपने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैरा 277(21) पर सहमति दी है, जो कहता है कि एलजी की सहमति की जरुरत नहीं है। हालांकि, आप इसी आदेश के पैराग्राफ(14), (15) और 16 को लागू करने से मना कर रहे हैं, जो कहता है कि केंद्र की विधायी शक्तियां केवल तीन विषयों तक ही सीमित है। अपने समर्थन में आप आदेश के पैराग्राफ 278 का हवाला देते हैं जो कहता है कि उचित नियमित बैंच के सामने रखा जाएगा। इसलिए आप उस नियमित बैंच के आदेश का इंतजार करेंगे।
इस पूरे मामले पर जानकारों का कहना है कि सुप्रीम बेंच के द्वारा गृह मंत्रालय का साल 2015 में जारी नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया जाता है तब तक यह कानूनी तौर पर लागू रहेगा। कुछ जानकारों का कहना है कि सर्विसेज पर अधिकार के मामले में दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट की रेग्युलर बेंच के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
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आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि गृह मंत्रालय और एलजी मिलकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सौरभ ने कहा कि केंद्र सरकार को पता है कि जिस नोटिफिकेशन के जरिए उसने गैरकानूनी तरीके से दिल्ली सरकार की सारी पावर छीन ली थी, उसे सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है इसीलिए अब गृह मंत्रालय लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश में लगा है।
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