Blog: केजरीवाल को कुछ इस तरह क्लिक किया माफी का सुपर आइडिया

नई दिल्‍ली। पहले विक्रमजीत सिंह मजीठिया, उसके बाद नितिन गडकरी और अब कपिल सिब्‍बल से भी दिल्‍ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने माफी मांग ली है। सोशल मीडिया उनकी माफी पर अपने अंदाज में चुटकी ले रहा है। कुछ लोगों ने तो ऐप तक बना डाले हैं। अगर आपको भी केजरीवाल से माफी मंगवानी है तो ऐसे ऐप्‍स पर जा सकते हैं। दिल को थोड़ा सुकून जरूर प्राप्‍त होगा। डिजिटल के इस नए दौर में कसमें-वादे टूटने पर इसी तरह का जश्‍न होता है। होना भी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि इस निरर्थक संवाद, चुटकी लेने के घटिया अंदाज, गिरी हुई नफरत भरी भाषा और बेकार के चिंतन से क्‍या कोई अच्‍छा विचार पैदा हो सकता है?

Arvind Kejriwal apology

सोशल मीडिया में जो टाइमपास चल रहा है, वो तो चलता रहेगा, वहां गंभीर चिंतन की वैसे भी जगह नहीं है, लेकिन क्‍या केजरीवाल की माफी सिर्फ चुटकी लेने योग्‍य बात है? क्‍या इस धोखे को सिर्फ आनंद लेकर भूला जा सकता है? नहीं, बिल्‍कुल नहीं, अरविंद केजरीवाल कुछ साल पहले तक इस देश में क्रांति के सबसे बड़े नायक के तौर पर उभरे थे। एक ऐसा नायक जिसने भ्रष्‍टाचार पर 'परमाणु बम' गिराने की बात कही थी। एक ऐसा नायक जिसकी पार्टी में एक पानवाला भी टिकट लेकर चुनाव लड़ सकता है और बिना करोड़ों रुपये खर्च किए, चुनाव जीत भी सकता है।

अन्‍ना आंदोलन के समय और उसके कुछ समय बाद तक अरविंद केजरीवाल के नाम के साथ बड़ी पवित्रता का भाव था। पत्रकारिता में कार्य कर रहे संपादक, उप संपादक से लेकर आईटी कंपनी के बड़े-बड़े धुरंधर राष्‍ट्रहित पर एकमत, एकराय थे और एक ही नाम पर भरोसा था- अरविंद केजरीवाल। लेकिन केजरीवाल की क्रांति पंचवर्षीय योजना से भी बदतर निकली। दावा था- चरित्र निर्माण का, इसमें भरोसा था ईमानदारी के साथ विकास का, एक कसम थी लोकपाल की, एक लक्ष्‍य था राजनीति में सबकी समान भागीदारी का। लेकिन एक-एक कर सब चूर-चूर होता गया। प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव जैसे नेताओं की तिलांजलि दे दी गई। दिल्‍ली में सरकार बनने के कुछ समय बाद ही ईमानदारी का लंबा जनाजा निकला। कभी फर्जी मार्कशीट तो कभी राशन कार्ड वाली सीडी, कभी टैक्‍स की हेराफेरी तो कभी कुछ और। एक के बाद एक आरोप लगे और बचाव में झूठ पर झूठ बोला जाता रहा है।

विधायक अयोग्‍य ठहराए गए तो नया शिगूफा छोड़ा और अब कोर्ट के डंडे से बचने के लिए माफी का फर्जीवाड़ा। खैर, अब जब माफी ही मांगी जा रही है तो सिर्फ उन्‍हीं मामलों में क्‍यों जो कोर्ट में चल रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी को साइको कहने पर भी तो माफी हो। कुमार विश्‍वास, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, रमन सिंह, शीला दीक्षित से भी माफी मांगो। उन करोड़ों लोगों से भी माफी मांगो, जिन्‍होंने तुम्‍हारी फर्जी नौटंकी पर भरोसा किया।

केजरीवाल को उस ड्रामे के लिए भी माफी मांगी चाहिए जो मीडिया के दोस्‍तों के साथ राजनीति बदलने के नाम पर आपने किया। पहले विभिन्‍न चैनलों, अखबारों और न्‍यूज पोर्टल्‍स की एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट्स लीजिए। उसके बाद उन पत्रकारों से फोन पर मीठी-मीठी बातें कीजिए और बस, हो गया आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा खुलासा। हमारे पास दस्‍तावेज हैं, आम आदमी पार्टी ने इसी दावे के साथ मुकेश अंबानी, नितिन गडकरी, अरुण जेटली समेत न जाने कितने लोगों के खिलाफ कैमरों के सामने बड़ी-बड़ी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर उससे भी बड़े-बड़े भ्रष्‍टाचार के दावे किए। लेकिन हकीकत में आम आदमी पार्टी ने कभी किसी मुद्दे पर कभी किसी के खिलाफ अपनी मेहनत से कोई दस्‍तावेज जुटाए ही नहीं। वे तो आशुतोष, आशीष खेतान जैसे लोगों के भरोसे थे। इन लोगों की मदद से तथ्‍य जुटाओ, अखबारों की कतरन काटो और उन्‍हीं में मिर्च मसाला डालकर सबसे बड़ी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते रहे। अब मामले में कोर्ट पहुंचे तो मिस्‍टर केजरीवाल को लेने के देने पड़ गए।

केजरीवाल के पास सबूत, दस्‍तावेज तो कुछ थे नहीं। उस पर निजी मानहानि के भी गंभीर आरोप लगे। ले-देकर रास्‍ता एक ही बचा था, सत्‍ता चलानी है तो माफी मांग लो। बस अरविंद केजरीवाल को आइडिया जंच गया, क्‍योंकि सत्‍ता के लिए केजरीवाल कुछ भी करेगा। बच्‍चों की कसम खाने से लेकर एसी, बंगला, गाड़ी छोड़ने के वादे को तोड़ने तक, लोकपाल से लेकर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई तक हर वो बात जो सत्‍ता के रास्‍ते में आए उसे केजरीवाल वैसे ही हटा देंगे, जैसे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्‍वास को हटा डाला। आखिरकार आम आदमी पार्टी राजनीति को बदलने आई है और राजनीति को बदलने का केजरी फार्मूला अब तक समझ गए होंगे। हमारी कोई विचारधारा नहीं है। हमारी पार्टी में किसी स्‍वाभिमानी नेता की जगह नहीं है। हम किसी पर कुछ भी आरोप लगाएंगे, अगला कोर्ट जाएगा तो रोज माफी मांगकर आएंगे। इसके बाद भी सत्ता जाएगी तो जंतर मंतर जाएंगे दोबारा धरने पर बैठ जाएंगे।

नोट: अरविंद केजरीवाल और उनके समर्थकों को मेरा लेख बुरा लगे तो अभी बिना शर्त माफी मांगता हूं। कोर्ट जाने का भी इंतजार नहीं करूंगा।

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