जीडीपी आंकलन की नई प्रक्रिया का जेटली ने किया बचाव, दिया ये तर्क
नई दिल्ली। जीडीपी मूल्यांकन की प्रणाली को जिस तरह से केंद्र सरकार ने संशोधित किया और मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल की जीडीपी को कम किया, उसके बाद इस पूरे मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां पूर्व वित्त मंत्री ने नीति आयोग के इस आंकड़े को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बेहद भद्दा मजाक बताया है तो दूसरी तरफ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के इस फैसले का बचाव किया है। जेटली ने कहा कि फरवरी 2015 में सीएसओ ने नई प्रणाली को अपनाया था, जोकि वैश्विक परिपेक्ष्य में कहीं बेहतर है।

जेटली ने कहा कि सीएसओ ने वर्ष 2011-12 के आधार वर्ष मानते हुए जीडीपी आंकलन की प्रणाली को संशोधित किया और जीडीपी के नए आंकड़ों को जारी किया था। जेटली ने कहा कि यह नई सीरीज वैश्विक रूप से काफी तुलनात्मक और बेहतर है। इस प्रणाली में अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व को शामिल किया गया है, लिहाजा यह देश की अर्थव्यवस्था में काफी बेहतर तरह से प्रदर्शित करती है। गौर करने वाली बात है कि पी चिदंबर ने कहा था कि चिदंबरम ने कहा कि जिस तरह से जीडीपी के आंकड़ों में संशोधन किया गया है वह एक मजाक है और एनएससी को कमजोर करने जैसा है। नेशनल स्टैटिस्टिक कमीशन एक स्वतंत्र संस्था है जोकि इस बात को सुनिश्चित करती है कि आंकड़े वैश्विक आधार पर आधारित हो और इसे ध्यान में रखते हुए ही जीडीपी का मूल्यांकन किया जाता है।
गौरतलब है कि नीति आयोग ने बुधवार को डीजीपी के आंकड़ों को संशोधित किया है, जिसको लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नीति आयोग ने यूपी सरकार के कार्यकाल में जीडीपी के आंकड़ों में संशोधन करते हुए इसे 10.3 से घटाकर 8.5 कर दिया है। जीडीपी का यह आंकड़ा वर्ष 2011 का है, जिसे नीति आयोग ने घटाया है। बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े के अनुसार 2005-06 और 2011-12 के आंकड़ों को संशोधित किया गया है।
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