अरुण गोयल के इस्तीफे से ठीक पहले चुनाव आयोग में क्या चल रहा था? इनसाइड स्टोरी
चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के अचानक इस्तीफे के बाद नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। लेकिन, आखिर किन वजहों से गोयल ने चुनाव तारीखों के एलान से ठीक पहले यह कदम उठाया, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।
अटकलें तो कई हैं, लेकिन कोई भी पुख्ता नहीं है और न ही खुद अरुण गोयल ने अपने इस्तीफे की वजहों पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

अरुण गोयल के इस्तीफे से पहले क्या-क्या हुआ?
लेकिन, अब चुनाव आयोग के अंदर से ऐसी बातें छन-छनकर बाहर आ रही हैं, जिससे पता चलता है कि आखिर उनके इस कदम से पहले आयोग में माहौल क्या था?
अरुण गोयल ने 8 मार्च को चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा दिया था और 9 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसे मंजूर कर लिया। लेकिन, उनके इस्तीफे से एक दिन पहले यानी 7 मार्च तक नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में सबकुछ आम दिनों की तरह ही था।
इस्तीफे से पहले विदेशी मीडिया के लोगों को साथ चर्चा में शामिल हुए थे
उस दिन गोयल विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित विदेशी मीडिया के लोगों के साथ ऑफ-कैमरा चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के साथ शामिल हुए थे। इसमें तमाम विदेशी मीडिया ब्रांड के कम से कम 27 पत्रकार शामिल हुए थे।
कोलकाता में बेचैनी की शिकायत की थी -रिपोर्ट
उससे कुछ दिन पहले यानी 4 और 5 मार्च को ही वे सीईसी और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए थे।
अलबत्ता, टीओआई ने सूत्रों से मिले संकेतों के आधार पर बताया है कि कोलकाता पहुंचने पर उन्होंने बेचैनी और घबराहट की शिकायत जरूर की थी। लेकिन, 4 मार्च की देर शाम तक वे सभी बैठकों में शामिल भी हुए थे।
5 मार्च को कोलकाता में ओबेरॉय ग्रैंड होटल में ही उनके लिए डॉक्टर को भी बुलाया गया थ, जहां चुनाव आयोग के लोग ठहरे हुए थे। उनकी दवा भी तत्काल शुरू कर दी गई, लेकिन वह फिर भी बैचैनी महसूस कर रहे थे। इस वजह से 5 मार्च को कोलकाता में 12 बजे आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में नहीं शामिल हो पाए थे।
वे उसी दिन दोपहर बाद 3.25 बजे कोलकाता-दिल्ली की विस्तारा फ्लाइट से सीईसी और चुनाव आयोग के अन्य लोगों के साथ ही दिल्ली वापस लौट आए थे।
दिल्ली पहुंचने पर भी दो दिन सबकुछ सामान्य रहा
6 मार्च को भी अरुण गोयल निर्वाचन सदन पहुंचे थे, लेकिन उस दिन कोई बड़ी बैठक नहीं थी, जिसमें पूर्ण आयोग की उपस्थिति की आवश्यकता हो। 7 मार्च की मीटिंग की चर्चा तो ऊपर ही कर चुके हैं।
केंद्रीय गृह सचिव के साथ अहम बैठक वाले दिन दिया इस्तीफा
8 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक थी। उस दिन उन्हें चुनाव आयोग के तौर पर गृह सचिव अजय भल्ला के साथ होने वाली बैठक में मौजूद रहना था, जिसमें सुरक्षा बलों की तैनाती से संबंधित लॉजिस्टिक को अंतिम रूप दिया जाना था।
मतदान के चरणों को तय करने में इसकी बहुत ज्यादा अहमियत होती है, जिसके आधार पर सुरक्षा बलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया जाता है। लेकिन, उसी दिन उन्होंने राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज दिया।
कोई बड़े मतभेद सामने नहीं आ रहे हैं, फिर आखिर हुआ क्या था?
गोयल के इस्तीफे की जो एक वजह सामने आ रही है, वह मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से उनके मतभेद बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 15 फरवरी को एक और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के रिटायर होने के बाद यह मतभेद और बढ़ने शुरू हो गए।
ईटी की जानकारी के मुताबिक ज्यादातर मतभेद किसी बड़े मुद्दे को लेकर नहीं थे। मसलन, राज्यों में चुनाव तैयारियों का जायजा लेने जाने वाली चुनाव आयोग की टीम कितनी बड़ी हो और राज्यों में प्रेस ब्रीफिंग की फॉर्मेट कैसी हो, ऐसे ही सामान्य मुद्दों पर अलग-अलग राय रह रही थी।
'असहमति' का कोई औपचारिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं!
अंदर के लोगों का कहना है कि इन मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच 'असहमति' का कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं है। यह मतभेद 'मौखिक तौर पर' ही जाहिर हो रहे थे।
वैसे ये जरूर पता चला है कि जब पांडे रिटायर नहीं हुए थे तो ऐसे मतभेद बहुत ही सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिए जाते थे। कई बार मतभेद सामने आने पर आयोग अपने नोट और दस्तावेजों में बदलाव भी किए थे, यह भी जानकारी सामने आई है। यही नहीं, गोयल के कई सुझावों को भी 'माना गया था'।
मतलब, अंदर की जितनी भी जानकारी अभी सामने आई हैं, उससे नहीं लगता कि इसकी वजह से अरुण गोयल को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ जाए। बहरहाल, यह रहस्य तबतक रहस्य ही बना रहेगा, जब वे खुद अपने इस्तीफे की वजह साफ नहीं करते।












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