वोटिंग खत्म होते ही मेरठ छोड़ मुंबई क्यों चले गए थे BJP प्रत्याशी अरुण गोविल, अब खुद बताई वजह
पश्चिमी यूपी की मेरठ लोकसभा सीट पर बीजेपी ने इस बार टीवी सीरियल 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले एक्टर अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाया है। यहां पर वोटिंग खत्म होते ही अरुण गोविल मेरठ छोड़कर मुंबई लौट गए थे, जिसका विपक्षी दल खूब मुद्दा बना रही है।
अब गोविल ने चुनाव के बाद मुंबई जाने के पीछे की वजह बताई है। 66 वर्षीय अरुण गोविल ने सोशल मीडिया पर बाकायदा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया है कि वह बीजेपी के निर्देश पर मुंबई में हैं ताकि वहां की जिम्मेदारी निभा सकें।

अरुण गोविल ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''मेरे मेरठ के सम्मानित मतदाता बहनों- भाइयों और कार्यकर्ताओं। नमस्कारए होली के दिन 24 मार्च को भारतीय जनता पार्टी ने मेरे नाम की घोषणा की और उनके निर्देश पर 26 मार्च को मैं आपके बीच पहुंच गया। एक महीना आपके साथ रहकर आपके सहयोग से चुनाव प्रचार किया। चुनाव संपन्न हुआ। आपके प्रेम,सहयोग और सम्मान के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। अब पार्टी के निर्देश पर मैं मुंबई में हूं यहां की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए।''
बीजेपी उम्मीदवार ने आगे लिखा, ''पार्टी मुझे चुनाव प्रचार के लिए दूसरे क्षेत्रों में भी भेजने का कार्यक्रम बना रही है इस प्रक्रिया के पूरा होते ही मैं आपके बीच पहुंच जाऊंगा और मेरठ की जनता और भारतीय जनता पार्टी के सम्मानित कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में मेरठ को और उचाइयों तक ले जाने के लिए प्रयास आरंभ कर दूंगा। मैं हृदय की गहराइयों से एक बार फिर आपका धन्यवाद करता हूँ जो आपने इस चुनाव में मेरा सहयोग और उत्साहवर्धन किया। मीडिया बंधुओं का भी उनके सहयोग के लिए बहुत-बहुत आभार। आपका स्नेही,अरुण गोविल''
इससे पहले, यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय ने अरुण गोविल के मुंबई जाने का मुद्दा उठाया था। अजय राय ने 'एक्स' पर लिखा था कि पता चल रहा है कि मेरठ से बीजेपी प्रत्याशी रहे अरुण गोविल चुनाव निपटने के अगले ही दिन मुंबई निकल गए। शायद इन्हें जनता के बीच रहने में दिक्कत थी।
उन्होंने लिखा, ''ये जनाब कल पोलिंग बूथ के अंदर वीडियोग्राफी करा रहे थे। इनके चुनाव प्रचार में एक व्यापारी की जेब से 36000 रुपये उड़ा लिए गए। इतना ही नहीं चुनाव प्रचार में जब एक पत्रकार ने इनसे मेरठ के मुद्दे पूछे तो इन्हें कुछ नहीं पता था। ज़वाब में ये इतना ही बोल पाए कि पहले चुनाव हो जाये फिर मुद्दे देखेंगे। अब बताइये! ऐसे नेता से जनता को क्या उम्मीद होगी?"
अजय राय ने आगे लिखा कि ऐसे नेता कम अभिनेता से तो राम ही बचाएं! वैसे, भाजपा के अधिकांश नेताओं की यही रीति-नीति है। उन्हें जनता और जमीन से कोई मतलब नहीं। वे बस पैराशूट पॉलिटिक्स में यकीन रखते हैं।''












Click it and Unblock the Notifications