CAA का फायदा उठाने के लिए क्या क्रिश्चियन बनने लगे हैं मुस्लिम शरणार्थी

नई दिल्ली- नागरिकता संशोधन कानून को लेकर एक बहुत ही चौंकाने वाली खबर है। केंद्रीय ऐजेंसियों के पास ऐसी सूचना होने की खबर है कि कुछ मुस्लिम शरणार्थियों ने भारतीय नागरिकता पाने के लिए ईसाई धर्म अपनाना शुरू कर दिया है। ऐसे मामले कहीं और से नहीं राजधानी दिल्ली से आए हैं और इसके चलते सरकारी एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। खबरों के मुताबिक इनका मोडस ऑपरेंडी ये है कि बांग्लादेश, अफगानिस्तान या पाकिस्तान से आए मुस्लिम अगर क्रिश्चियन धर्म अपना लेते हैं तो उन्हें भारतीय नागरिकता मिल सकती है। क्योंकि, यह कानून इन मुल्कों से आए सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात करता है। हालांकि, ऐसे मामलों की संख्या अभी बहुत ज्यादा नहीं बताई जा रही है, लेकिन अगर कुछ भी हैं तो यह फौरन सचेत हो जाने का विषय लगता है।

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    CAA का फायदा लेने Rohingya Muslims अपना रहे ईसाई धर्म | वनइंडिया हिंदी
    नागरिकता पाने के लिए क्रिश्चियन बन रहे हैं मुसलमान?

    नागरिकता पाने के लिए क्रिश्चियन बन रहे हैं मुसलमान?

    इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार को आगाह किया है कि कुछ अफगानी और रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी नागरिकता संशोधन कानून का फायदा उठाने के लिए ईसाई बनने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक उनकी सोच ये है कि धर्म परिवर्तन करके वह भारतीय नागरिकता पाने के हकदार बन जाएंगे। एजेंसियों की नजर में कम से कम 25 ऐसे मामले आए हैं, जिसमें अफगानिस्तानी मुसलमानों के क्रिश्चियन बनने की जानकारी मिली है और बाकियों की भी पड़ताल जारी है। गौरतलब है कि यह कानून पिछले साल दिसंबर में संसद से पास हुआ था और इस साल 10 जनवरी से लागू भी हो चुका है। इसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए नियमों का नोटिफिकेशन अभी जारी नहीं किया है।

    दिल्ली में लगभग 150,000 से 160,000 अफगानी मुसलमान

    दिल्ली में लगभग 150,000 से 160,000 अफगानी मुसलमान

    दक्षिणी दिल्ली के एक अफगान चर्च के हेड अदीब अहमद मैक्सवेल का कहना है कि, 'सीएए के बाद ईसाई धर्म में परिवर्तित होने की मांग करने वाले अफगानी मुसलमानों की संख्या में उछाल आया है।' 34 वर्षीय मैक्सवेल 21 की उम्र में भारत आए थे। उनके माता-पिता सुन्नी मुसलमान हैं और अफगानिस्तान में काबुल के पास रहते हैं। उनके मुताबिक, 'ज्यादातर अफगान यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर फॉर रेफ्यूजी(यूएनएचसीआर) के तहत शरण मांगने के लिए आवेदन करते हैं।' आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में करीब 150,000 से 160,000 अफगानी मुसलमान रहते हैं। इनका ठिकाना मूल रूप से राजधानी के ईस्ट ऑफ कैलाश, लाजपत नगर, अशोक नगर और आश्रम जैसे इलाकों में है।

    तो रोहिंग्या खुद को इसलिए बताते हैं बांग्लादेशी!

    तो रोहिंग्या खुद को इसलिए बताते हैं बांग्लादेशी!

    इनके अलावा सरकारी आंकड़े ये भी बताते हैं कि देशभर में इस समय करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं, जिनकी संख्या सबसे ज्यादा जम्मू और कश्मीर में है। इनमें से ज्यादातर शरणार्थी 2012 से पहले से भारत में रह रहे हैं और अब बांग्लादेशी होने के दावे के साथ ईसाई बनने की फिराक में लग रहे हैं। गौरतलब है कि रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से उत्पीड़न का शिकार होकर भारत में दाखिल हुए हैं और उनका मूल ठिकाना राखिने है, जो वहां का एक प्रांत है।

    6 साल में 4,000 शरणार्थियों को मिली नागरिकता

    6 साल में 4,000 शरणार्थियों को मिली नागरिकता

    बता दें कि पिछले 6 साल में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए 4,000 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी गई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक 2014 में बांग्लादेश के साथ हुए उस सीमा समझौते के बाद जिसके तहत उसके 50 से ज्यादा इलाकों को भारत में मिलाया गया है, करीब 14,864 और बांग्लादेशी नागरिकों को भी भारतीय नागरिकता दी गई है। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत के तीन पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर शरणार्थी बनकर आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता पाने का अधिकार मिल चुका है। (तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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