मई में उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति दर, ईंधन के बढ़ते दाम बने वजह
नई दिल्ली, 14 जून: पिछले साल फरवरी में भारत में कोरोना वायरस की एंट्री हुई, जिस वजह कई महीनों तक काम-धंधे बंद रहे। साथ ही आम आदमी की कमर टूट गई। अब जो बची हुई कसर थी, वो महंगाई पूरी कर दे रही है। कच्चे तेल और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में बढ़कर 12.94 प्रतिशत पर पहुंच गई। ये अब तक का उच्चतम स्तर है।
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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक मासिक WPI पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर मई में 12.94% हो गई, जो अप्रैल 2021 में 10.49% थी। इसका मुख्य कारण पेट्रोल, डीजल, नेफ्था, फर्नेस ऑयल आदि पेट्रोलियम उत्पादों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में पिछले वर्ष इसी महीने की तुलना में ज्यादा वृद्धि है। वहीं मई में ही ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति बढ़कर 37.61 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 20.94 प्रतिशत थी। साथ ही विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति मई में 10.83 प्रतिशत रही, जो उससे पहले 9.01 प्रतिशत थी।
हालांकि खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति मई में मामूली रूप से कम होकर 4.31 प्रतिशत पर आ गई लेकिन प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मई में प्याज की मुद्रास्फीति 23.24 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल में 19.72 प्रतिशत थी। आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर अपरिवर्तित रखा और विकास का समर्थन करने के लिए एक उदार रुख बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता जताई। वहीं मई के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े भी जल्द जारी कर दिए जाएंगे।












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