Aquaculture: एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भारत का बढ़ेगा Export, रिकॉर्ड उत्पादन के दिशा में अहम कदम
मिट्टी के अलावा पानी में कृषि के क्षेत्र में भारत अपनी उपलब्धियों के जाना जाता है। एक्वाकल्चर उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में टॉप रहने के लिए राज्यों में होड़ मची है।

Aquaculture Export: कृषि के आधुनिक तकनीकी ने उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि की है। इससे एग्रीकल्चर सेक्टर समृद्ध होने के साथ निर्यात के क्षेत्र में भी विस्तार हो रहा है। जलीय कृषि (Aquaculture) की बात करें तो इस क्षेत्र में पिछले वर्ष आंध्र में जलीय कृषि उत्पादन में सबसे आगे रहा। राज्य कृषि उद्योग पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है जो देश में तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। यह राज्य के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ भी प्रदान करता है। आंध्र प्रदेश देश के समुद्री खाद्य निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, अंडे के अलावा मछली और झींगा (Prawn Fish) के उत्पादन में पहले स्थान पर है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में समुद्री निर्यात में शीर्ष पर रहा।
आंध्र प्रदेश 3 मार्च और 4 मार्च को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और 28 मार्च और 29 मार्च को विजाग में G20 समिट के लिए तैयार है। राज्य सरकार की कृषि क्षेत्र की नीतियों और उपलब्धियों को लेकर जी 20 देशों के सामने होगी। राज्य ने जलीय कृषि के लिए 974 किमी की लंबी तटरेखा के अलावा, राज्य में अनुकूल जलवायु परिस्थितियां और पर्याप्त जल संसाधन हैं। आंध्र प्रदेश में 2.12 लाख हेक्टेयर में लगभग 1.38 लाख किसान जलीय कृषि में शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश में 111 कोल्ड स्टोरेज में 2.27 मीट्रिक टन एक्वा उत्पाद रखे जाते हैं। सरकार अब एक्वा जोन के तहत आने वाले 10 एकड़ से कम के क्षेत्रों में खेती करने वाले एक्वा किसानों को सब्सिडी वाली बिजली प्रदान कर रही है, जिसमें वर्तमान में लगभग 26,000 बिजली कनेक्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने जलीय कृषि के विकास का समर्थन करने के लिए कई पहलों को लागू किया है, जैसे कि तालाब और टैंक निर्माण को सब्सिडी देना, हैचरी की स्थापना करना और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना है।
हाल ही में भारत और ब्रिटेन के मत्स्य वैज्ञानिकों ने एक बड़ी पहल की है। इसके तहत भारत में वन हेल्थ एक्वाकल्चर के कॉन्सेप्ट के लिए भारत-ब्रिटेन साझेदारी का आह्वान किया है। जिसके जरिए जलीय जानवरों और पौधों और पर्यावरण को समृद्ध बनाया जा सकेगा। भारत-ब्रिटेन संयुक्त कार्यशाला में विशेषज्ञों एक स्वर में कहा कि अब समुद्री खाद्य मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने की आवस्यकता है। जिसके लिए जलीय कृषि को बढ़ावा देना चाहिए।
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