आंध्र प्रदेश: कोटप्पाकोंडा तीर्थस्थल को 2 करोड़ रुपये से विकसित किया जाएगा
आंध्र प्रदेश के कोटप्पाकोंडा तीर्थस्थल को दो करोड़ रुपये से विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए 1.4 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पहले चरण में तीर्थस्टल में मिट्टी और नमी संरक्षण और बाड़ लगाने के कार्यों के साथ-साथ वृक्षारोपण कार्य भी किए जाएंगे।

केंद्र सरकार के द्वारा नगरवन योजना के तह ये दो करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जिसके बाद कोटप्पाकोंडा गिरिप्रदक्षिणा नगरवनम को जल्द नया स्वरूप मिलेगा।
गौरतलब हे कि कोटप्पाकोंडा एक प्रसिद्ध और पौराणिक मंदिर है, जहां पर हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धातुल दर्शन के लिए आते हैं।
कोटप्पाकोंडा मंदिर पर्यटन को विकसित करने और स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण के लिए, अधिकारियों ने नगरवनम स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पहले चरण में तीर्थस्थल के विकास के लिए 1.4 करोड़ रुपये जारी किये हैं।
पहले चरण में मिट्टी और नमी संरक्षण कार्यों और बाड़ लगाने के कार्यों के साथ-साथ विशेष वृक्षारोपण कार्य किया जाना है। पलनाडु जिला वन अधिकारी एन राम चंद्र राव ने बताया कि
कोटप्पकोंडा पहाड़ी की तलहटी में गिरिप्रदक्षिणा के रूप में 4.1 किलोमीटर लंबे ट्रैक को विकसित करने की योजना बनाई गई है। जिले के अन्य नगरवनम के विपरीत, कोटप्पाकोंडा नगरवनम को एक अनोखे तरीके से विकसित किया जाएगा।पंचतत्व, प्रकृति, विनायकवनम, उसिरिवनम, मारेडुवनम, रुद्राक्षवनम और औषधीय पौधों के ट्रैक सहित आठ प्रकार के विभिन्न पैदल ट्रैक स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने दावा कि इन आठ ट्रैक में प्रत्येक ट्रैक तीर्थस्थल आने वाले अगंतुकों को आकर्षित करेगा और इसके अपने फायदे अगल स्वास्थ्य संबंधी भी फायदे होंगे।
खासतौर पर पंचतत्व ट्रैक, जो 20 मिमी पत्थर, 10 मिमी पत्थर, 6 मिमी चिप्स, नदी के पत्थर, खुरदरी रेत, पेड़ की छाल और काली मिट्टी सहित आठ घटकों से बनाकर तैयार किया जाएगा।
वन अधिकारी एन राम चंद्र राव ने बताया
ट्रैक में तीन चरण होंगे, इस पंचतत्व ट्रैक के स्वास्थ्य लाभ हैं। जिसमें हरियाली और औषधीय पौधों के बीच इस ट्रैक पर चलने से अनिद्रा को नियंत्रित करने, प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने, रक्त परिसंचरण में सुधार करने, तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने और हार्मोन को सक्रिय करने, सूजन को कम करने, हृदय गतिविधि को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पीने के पानी, कियोस्क, वॉशरूम, सिट-आउट सहित सभी बुनियादी सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी।












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