Andaman Sea: 36 घंटे तक मौत से जंग! 250 साथियों के डूबने के बाद, पानी की एक बोतल ने कैसे बचाई रफीकुल की जान?
अंडमान सागर (Andaman Sea) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य की तलाश में मलेशिया जा रहे सैकड़ों लोगों से भरी नाव समुद्र में डूब गई है। मिली जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश से रवाना हुई एक ओवरलोडेड नाव समुद्र की लहरों और खराब मौसम का सामना नहीं कर पाई और पलट गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद से 250 से अधिक लोग लापता हैं।
लापता हुए लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी और प्रवासन एजेंसियों ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे एक बड़ी मानवीय त्रासदी करार दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि मानव तस्करी का एक भयावह जाल था, जहां लोगों को नौकरी का झांसा देकर मौत के सफर पर धकेल दिया गया।

तस्करी और धोखे का जाल, कैसे शुरू हुआ मौत का सफर?
इस हादसे में जीवित बचे इंसान ने अपनी जो आपबीती सुनाई है, वह रूह कंपा देने वाली है। रफीकुल इस्लाम नामक युवक जो इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं, ने बताया कि उसे 2 अप्रैल को बांग्लादेश के कुतुपालोंग इलाके से बेहतर नौकरी का लालच देकर फंसाया गया था। तस्करों ने उसे और कई अन्य लोगों को कई दिनों तक एक अज्ञात घर में बंधक बनाकर रखा। 4 अप्रैल की रात उन्हें छोटी नावों के जरिए समुद्र के बीच खड़ी एक बड़ी मछली पकड़ने वाली नाव पर ले जाया गया।
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नाव के भीतर के खौफनाक हालात
जैसे-जैसे सफर आगे बढ़ा, तस्करों की दरिंदगी बढ़ती गई। नाव की क्षमता कम होने के बावजूद उसमें करीब 280 लोगों को ठूंस दिया गया। यात्रियों को मछली और जाल रखने वाले बेहद छोटे कंपार्टमेंट में बंद कर दिया गया। रफीकुल के अनुसार, भीड़ और ऑक्सीजन की कमी के कारण सफर के दौरान ही 25 से 30 लोगों की मौत हो गई थी। जब भी कोई विरोध करता, तस्कर नाव डुबोने की धमकी देकर उन्हें खामोश कर देते थे।
पानी की बोतल के सहारे शख्स ने बचाई अपनी जान
खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण नाव बीच समुद्र में असंतुलित होकर पलट गई। हादसे के बाद बांग्लादेश कोस्ट गार्ड सक्रिय हुई और 9 अप्रैल को एक जहाज की मदद से समुद्र में फंसे 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बचाए गए रफीकुल ने बताया कि उसने करीब 36 घंटे तक समुद्र की लहरों के बीच संघर्ष किया। दो-लीटर वाली पानी की बोतल के सहारे वह तैरता रहा। इस दौरान नाव से फैले तेल की वजह से उसके शरीर पर गंभीर जलन भी हुई। फिलहाल लापता 250 लोगों की तलाश जारी है, लेकिन समय बीतने के साथ उनके बचने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं।
मलेशिया जाने को क्यों मजबूर हैं लोग?
अंडमान सागर में होने वाले ये हादसे कोई नए नहीं हैं। म्यांमार में हिंसा और उत्पीड़न से बचकर बांग्लादेश के शिविरों में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थी वहां की बदतर स्थिति से तंग आकर मलेशिया जैसे देशों में शरण पाना चाहते हैं। मानव तस्कर इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं और उन्हें अवैध समुद्री रास्तों के जरिए भेजने का झांसा देते हैं। यह रास्ता न केवल गैरकानूनी है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे खतरनाक रूटों में से एक माना जाता है।
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