अजित पवार और उनके साथियों पर भ्रष्टाचार के मामले में अब क्या होगा?
मानसी देशपांडे
बीबीसी मराठी के लिए
दो जुलाई को महाराष्ट्र में एक नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के तहत अजित पवार सहित एनसीपी के नौ विधायक बीजेपी-शिव सेना (शिंदे) गुट की सरकार में शामिल हुए.
दिलचस्प यह है कि बीजेपी ने अजित पवार सहित इन विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.
लेकिन अजित पवार अब राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, साथ ही उन्होंने अन्य विधायकों को भी मंत्री बनवाया है.
हालांकि इनमें से कुछ नेताओं के पीछे जांच एजेंसियां लगी हुई थीं.
शरद पवार से पाला बदल कर सरकार में शामिल हुए इन नेताओं पर क्या-क्या आरोप लग रहे थे. देखिए पूरी सूची.
अजित पवार पर क्या-क्या थे मामले
अजित पवार अब एकनाथ शिंदे की सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं.
उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने वाले और अजित दादा चक्की पीसिंग जैसे बयान देने वाले देवेंद्र फडणवीस, उनके बराबर ही उपमुख्यमंत्री के तौर पर सरकार में शामिल हैं.
हालांकि बीजेपी की ओर से उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे जबकि चीनी मिलों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच में ईडी का शिकंजा उन पर कसने लगा था.
पिछले साल मार्च महीने में आयकर विभाग ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के रिश्तेदारों के घर पर छापा मारा था. इतना ही नहीं आयकर विभाग ने कुछ संपत्तियों पर ज़ब्ती भी की थी.
अजित पवार से संबंधित जरंदेश्वर चीनी मिल पर जब्ती की कार्रवाई की गई थी.
इस मामले में अजित पवार पर बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाए थे. सोमैया ने कहा था कि अजित पवार का वित्तीय कारोबार अद्भुत है.
किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि बिल्डरों के पास उनके और उनके रिश्तेदारों के खातों में सौ करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति है.
राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सिंचाई घोटाला मामले में अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी.
लेकिन, मई 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने विदर्भ सिंचाई घोटाला मामले की नए सिरे से जांच शुरू की थी.
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अजित पवार के साथ बेटे भी थे घेरे में
इन सबके साथ अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर भी आयकर विभाग ने छापा मारा था.
आयकर विभाग ने यह दावा किया था कि अजित पवार के रिश्तेदारों पर हुई इस छापेमारी में 184 करोड़ रुपये का बेनामी वित्तीय लेनदेन का पता चला है.
अप्रैल, 2023 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सहकारी बैंक घोटाले के सिलसिले में ईडी ने अजित पवार और सुनेत्रा पवार से जुड़ी एक कंपनी के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर किया.
लेकिन इसमें अजित पवार और सुनेत्रा पवार का नाम शामिल नहीं था. इसके बाद से ही एनसीपी में बग़ावत की चर्चा शुरू हो गई थी.
इस ख़बर के सामने आने के बाद अजित पवार ने सार्वजनिक तौर पर अपनी सफ़ाई भी दी थी.
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छगन भुजबल को दो साल तक नहीं मिली थी ज़मानत
छगन भुजबल पर 2014 के बाद से ही जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा था.
मार्च, 2016 में उन्हें नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन निर्माण में कथित गबन और बेहिसाब संपत्ति जमा करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
गिरफ़्तारी के बाद उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल भेज दिया गया. काफ़ी कोशिशों के बावजूद अगले दो साल तक उन्हें ज़मानत नहीं मिली.
हालांकि, सितंबर 2021 में छगन भुजबल को महाराष्ट्र सदन के कथित गबन के मामले में बरी कर दिया गया था.
बॉम्बे सेशन कोर्ट ने छगन भुजबल समेत छह आरोपियों को बरी किया था. हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो ने कथित महाराष्ट्र सदन गबन मामले में भुजबल और उनके परिवार के ख़िलाफ़ सबूत होने का दावा किया है.
इस मामले के अलावा छगन भुजबल और उनसे जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ अलग-अलग मामले दर्ज हैं और उनकी सुनवाई लंबित है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ अलग मामला भी दर्ज किया था.
इस साल जनवरी में, एक सामाजिक कार्यकर्ता ने 2021 के अदालती आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिस पर सुनवाई लंबित है.
भुजबल के ख़िलाफ़ मुंबई विश्वविद्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो का एक मामला विशेष अदालत में लंबित है.
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हसन मुश्रीफ
जनवरी 2023 में ईडी ने कोल्हापुर में एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ के आवास और फैक्ट्री पर छापा मारा था.
विधायक हसन मुश्रीफ पर कोल्हापुर के कागल में एक शुगर फैक्ट्री को अवैध रूप से चलाने का आरोप था.
बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि हसन मुश्रीफ के दामाद और ख़ुद मुश्रीफ ने इस फैक्ट्री के ज़रिए 100 करोड़ रुपये का घोटाला किया है.
मार्च 2023 में, हसन मुश्रीफ और उनके सीए को ईडी ने कार्यालय में बुला कर पूछताछ की.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुश्रीफ की गिरफ्तारी पूर्व ज़मानत याचिका अप्रैल में एक विशेष अदालत ने ख़ारिज कर दी थी.
इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी थी, जिसकी समय सीमा पिछले हफ्ते बढ़ाकर 11 जुलाई कर दिया गया था.
उनके तीनों बेटों की गिरफ़्तारी पूर्व ज़मानत की अपील विशेष अदालत में लंबित है.
अदिति तटकरे
अदिति तटकरे एनसीपी नेता सुनील तटकरे की बेटी हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंचाई घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो, अजित पवार के साथ सुनील तटकरे की भी जांच कर रही थी.
2017 में एसीबी द्वारा दायर आरोपपत्र में तटकरे के नाम का उल्लेख किया गया था.
हालांकि उस समय उनका जिक्र अभियुक्त के तौर पर नहीं किया गया था.
अधिकारियों ने कहा था कि इसके बाद अलग से आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा.
इसी मामले में ईडी ने 2022 में तटकरे के ख़िलाफ़ प्रारंभिक जांच शुरू की थी.
धनंजय मुंडे
2021 में एक महिला ने धनंजय मुंडे के ख़िलाफ़ रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.
लेकिन इसके बाद उन्होंने ये शिकायत वापस ले ली थी.
प्रफुल्ल पटेल
प्रफुल्ल पटेल ने दो जुलाई को शपथ नहीं ली, लेकिन वह शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे.
यूपीए की केंद्र सरकार के दौरान प्रफुल्ल पटेल केंद्रीय उड्डयन मंत्री थे.
उनके मंत्री रहने के दौरान ही 2008-09 में एविएशन लॉबिस्ट दीपक तलवार विदेशी एयरलाइंस की मदद कर रहे थे.
उन्होंने तीन अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के लिए कुछ ज़्यादा कमाई वाले हवाई मार्ग सुरक्षित किए. उसके लिए दीपक तलवार को 272 करोड़ रुपये मिले थे.
इससे एयर इंडिया को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था.
ईडी ने आरोप लगाया था कि ये सभी लेनदेन प्रफुल्ल पटेल के केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान हुए थे.
इसके साथ ही 70 हज़ार करोड़ रुपये के 111 विमानों की ख़रीद और एयर इंडिया एवं इंडियन एयरलाइंस के विलय के मामले की जांच ईडी कर रही थी.
इस मामले में ईडी ने जून, 2019 में प्रफुल्ल पटेल को नोटिस जारी किया था. उन्हें पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था.
शिंदे के साथ गए शिव सेना विधायकों पर भी था जांच एजेंसियों का शिकंजा
2022 में महाविकास अघाड़ी से बाहर होने के लिए एकनाथ शिंदे ने जब बग़ावत की थी तो उनके साथ भी ऐसे विधायक शामिल थे, जिन पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा था.
एक नज़र उन नेताओं पर भी जो जांच एजेंसियों के शिंकजे से बचने के लिए शिंदे के साथ गए थे.
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प्रताप सरनाईक
सरनाईक नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएससीएल) के कथित घोटाले के सिलसिले में ईडी के रडार पर थे.
उनकी संपत्ति ईडी ने जब्त कर ली थी. इस मामले में आस्था ग्रुप ने विहंग आस्था हाउसिंग को 21.74 करोड़ रुपये ट्रांसफ़र किए थे.
ईडी ने दावा किया कि विहंग एंटरप्राइजेज और विहंग इम्फ्रा को 11.35 करोड़ रुपये दिए गए. इन दोनों कंपनियों का नियंत्रण प्रताप सरनाईक के पास है.
ईडी की कार्रवाई के बाद सरनाईक ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था.
इसमें सरनाईक ने कहा था, 'अगर कांग्रेस-राष्ट्रवादी सत्ता में साथ रहकर अपने ही कार्यकर्ताओं को तोड़ रहे हैं और अपनी पार्टी को कमजोर कर रहे हैं, तो यह मेरी निजी राय है कि हमें एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ जाना चाहिए.'
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यामिनी जाधव
शिवसेना विधायक यामिनी जाधव के पति यशवंत जाधव मुंबई नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष थे. वित्तीय घोटाला मामले में यशवंत जाधव भी ईडी के रडार पर हैं.
कुछ महीने पहले आयकर विभाग ने जाधव पर छापा मारा था. इसमें 40 संपत्तियां जब्त की गईं. इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के लिए जाधव को नोटिस जारी किया.
हालांकि, इंडिया टुडे की एक ख़बर के मुताबिक शिकायत के बाद अभी तक यशवंत जाधव के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है.
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भावना गवली
शिव सेना सांसद भावना गवली ने शिंदे समूह का साथ दिया था. उन्होंने उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में कहा था, “पार्टी के कार्यकर्ता आपसे हिंदुत्व के मुद्दे पर फ़ैसला लेने का अनुरोध कर रहे हैं.”
भावना गवली भी ईडी के रडार पर थीं, उन्हें ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था.
गवली के महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान ट्रस्ट में गड़बड़ी के मामले में ईडी ने नवंबर 2022 में चार्जशीट दाखिल की थी.
इस कथित गबन के मामले में भावना गवली के क़रीबी रिश्तेदार सईद खान ईडी की हिरासत में थे. हालांकि बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई थी.
ईडी ने उनकी 3.5 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया था.
ईडी के दावे के मुताबिक ट्रस्ट से पैसा निकालने के लिए महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान ट्रस्ट को एक कंपनी में बदलने की साजिश रची गई थी.
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