Anantnag Encounter: उरी हमले के बाद जैसे हालात, क्या फिर से सर्जिकल स्ट्राइक करवाएगी मोदी सरकार?
कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग में पिछले चार दिनों से एनकाउंटर जारी है। इसमें तीन वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शहीद हो गए। साथ ही कई जवान घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है। साथ ही इसे अपने कमांडर की मौत का बदला बताया।
वहीं दूसरी ओर इस हमले के बाद सरकार पर दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। ये घटना उरी हमले की तरह है, जिसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में घुसकर आतंकियों की सफाया किया था।

दरअसल 18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आत्मघाती हमलावरों ने उरी स्थित सैन्य बेस पर हमला किया। जिसमें भारतीय सेना के 18 से ज्यादा जवान शहीद हो गए, जबकि बड़ी संख्या में जवान घायल हुए थे। इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा फैल गया था। जगह-जगह पर प्रदर्शन हुए। साथ ही पाकिस्तान को जवाब देने की मांग की जाने लगी।
इससे सरकार पर दबाव बना और 10 दिन बाद 29 सितंबर 2016 को पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक हुई। 2016 जैसे हालात फिर से बन गए हैं। अनंतनाग एनकाउंटर में कर्नल मनप्रीत सिंह, बटालियन कमांडिंग मेजर आशीष धोनैक और जम्मू-कश्मीर पुलिस के DSP हुमायूं भट शहीद शहीद हुए। जिसके बाद देश में गम और गुस्से का माहौल है।
कर्नल के बेटे ने वर्दी पहनकर किया सैल्यूट
वहीं दूसरी ओर शुक्रवार को कर्नल मनप्रीत सिंह का मोहाली में अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान उनके सात साल के बेटे को देखकर सबकी आंखें नम हो गईं। वो सैनिकों की तरह वर्दी पहनकर पिता को अंतिम विदाई देने पहुंचा था। इसके अलावा उसने पिता को सैल्यूट भी किया।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी ऐसा नजारा देखने को मिला था। उस हमले में कर्नल एमएन राय शहीद हुए थे। उनकी बेटी ने भी अंतिम संस्कार के वक्त पिता को सैल्यूट कर उनकी यूनिट का नारा लगाया था। जिसको देखकर सभी की आंखें नम हो गई थीं।
जवानों में भी गुस्सा
वहीं सैनिकों में भी गुस्सा है। अनंतनाग हमले का बदला लेने के लिए घाटी में लगातार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही। इसके तहत बारामूला में एक आतंकी को ढेर किया गया, जबकि दो आतंकी कोकरनाग एनकाउंटर में मारे गए हैं।
जवाबी कार्रवाई के लिए फेमस है मोदी सरकार
मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई। इसके एक साल बाद 2016 में मणिपुर में सेना पर उग्रवादी हमला हुआ, जिसमें 6 डोगरा रेजीमेंट के 18 सैनिक शहीद हो गए। इसका बदला लेने के लिए म्यांमार में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।
इसके बाद सितंबर 2016 में उड़ी में हमला हुआ, जिसके बदले पीओके में आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक हुई। वहीं 2019 के फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था। जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए। इस पर मोदी सरकार ने पीओके में एयर स्ट्राइक करवाई थी। इसके तहत भारतीय वायुसेना के विमानों ने एलओसी को पार किया और आंतकी शिविरों पर बम गिराए।
पाकिस्तान को भी सता रहा डर
वहीं दूसरी ओर अनंतनाग हमले के बाद पाकिस्तान को डर है कि भारतीय सेना पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती है। ऐसे में वो अपने यहां मौजूद आतंकी शिविरों को दूसरी जगह शिफ्ट कर रहा। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक टेरर कैंप को पाकिस्तानी सेना के कैंप के पास शिफ्ट किया जा रहा, ताकि उनको भारतीय सेना की कार्रवाई से बचाया जा सके।












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