सीएए पर किसी से भी चर्चा को तैयार, आइए तीन दिन के भीतर दूंगा समय: अमित शाह
सीएए पर किसी से भी चर्चा को तैयार हूं : अमित शाह
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार किसी से भी चर्चा के लिए तैयार है। शाह ने कहा, मैं किसी को तीन दिन के भीतर समय दूंगा जो मेरे साथ नागरिकता संशोधन अधिनियम से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है। हकीकत यह है कि लोग मिलना नहीं चाहते हैं। सिर्फ सियासत हो रही है और बिना किसी आधार के प्रदर्शन किए जा रहे हैं। गुरुवार को टाइम्स नाऊ समिट में बोलते हुए अमित शाह ने ये बात कही।
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बताएं सीएए कैसे मुसलमानों के खिलाफ: शाह
शाह ने कहा, किसी ने आज तक मुझे ऐसा प्रावधान नहीं बताया कि सीएए के किस प्रावधान के तहत वो ये मानते हैं कि ये एंटी मुस्लिम है। अगर भाजपा का विरोध ही करना है तो फिर कुछ भी हो सकता है इस विषय पर सियासत जारी है उसमें हम क्या कर सकते हैं। शाह ने कहा, सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के पास किसी तरह का तथ्यात्मक आधार नहीं है, लिहाजा विरोध का कोई मतलब नहीं है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के जिन धार्मिक अल्पसंख्यकों से भारत आने का वादा कांग्रेस ने किया था उसे कांग्रेस ने कहां निभाया। कांग्रेस ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की इच्छा का भी सम्मान नहीं किया

एनआरसी कांग्रेस ही लाई थी
अमित शाह ने कहा कि एनआरसी के संबंध में पहल कांग्रेस की तरफ से ही की गई थी। प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में कमेटी बनी जिसने फैसला किया था देश के सभी लोगों की पहचान के लिए एक रजिस्टर बनना चाहिए तो कांग्रेस सिर्फ बरगलाने का काम कर रही है। जहां तक एनआरसी लागू करने की बात है फिलहाल किसी तरह का फैसला नहीं किया गया है।
वहीं एनपीआर पर उन्होंने कहा, एनपीआर, जनगणना की तरह ही है, किसी को दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं है। अगर जो लोग दस्तावेज नहीं दिखाना चाहते हैं तो उनसे कौन कहता है कि दस्तावेज दिखाने के लिए। मुंह से कहना ही दस्तावेज दिखाना है।

कश्मीर पर ये बोले शाह
जम्मू-कश्मीर में नेताओं की हिरासत पर शाह ने कहा, उनकी रिहाई पर फैसला स्थानीय प्रशासन को करना है। जहां तक आप महबूबा मुफ्ती या उमर अब्दु्ल्ला की बात है तो उनके बहुत से ऐसे ट्वीट हैं जो भड़काऊ हैं। जहां तक नेताओं के कश्मीर जाने का सवाल है कि कोई भी जा सकता है। वहां जाकर किसी को भड़काने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
एससी-एसटी समाज को नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर अमित शाह ने कहा, सच यह है कि अगर इस संबंध में कोई दोषी तो उसके लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है। 2012 में उत्तराखंड की सरकार ने फैसला किया था और उस समय कांग्रेस की सरकार थी।












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