हिंदी विवाद के पीछे छिपी DMK, तमिल में पाठ्यक्रम अनुवाद का साहस नहीं: अमित शाह
Amit Shah News: तमिलनाडु में भाषा को लेकर सियासत गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डीएमके सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसमें मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को तमिल में अनुवाद करने का साहस नहीं है। उन्होंने वादा किया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो यह काम जरूर पूरा किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि डीएमके सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए हिंदी भाषा विवाद को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके भ्रष्टाचार छिपाने के लिए भाषा का मुद्दा उछाल रही है, जबकि हकीकत यह है कि वह खुद तमिल भाषा को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।

'हिंदी से किसी भाषा की प्रतिस्पर्धा नहीं'
अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदी किसी भी अन्य भारतीय भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं है, बल्कि यह सभी भाषाओं की सहयोगी है। उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं को मजबूत बनाती है और सभी भारतीय भाषाएं हिंदी को।
राजभाषा विभाग का बड़ा फैसला
गृह मंत्री ने ऐलान किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 'भारतीय भाषा अनुभाग' की स्थापना की है, जो तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, पंजाबी, असमिया, बंगाली समेत सभी भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार पर काम करेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिसंबर से सरकारी पत्राचार क्षेत्रीय भाषाओं में किया जाएगा।
विपक्ष का जवाब: 'भाजपा का तमिलनाडु में कोई भविष्य नहीं'
डीएमके के वरिष्ठ नेता वाइको ने अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हिंदी भाषा को 'कठोर' बताते हुए कहा कि इसका कोई साहित्य और व्याकरण नहीं है। उन्होंने अमित शाह को अहंकारी बताते हुए कहा कि भाजपा तमिलनाडु में कभी सत्ता में नहीं आएगी।
भाषा विवाद पर बढ़ती सियासत
तमिलनाडु में हिंदी और तमिल को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। अब भाजपा और डीएमके के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग तेज हो गई है। अमित शाह का दावा है कि भाजपा तमिल भाषा को बढ़ावा देना चाहती है, जबकि डीएमके भाजपा पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा तमिलनाडु में अपनी भाषा नीति को लेकर क्या रणनीति अपनाती है और क्या वह राज्य में राजनीतिक पकड़ मजबूत कर पाती है या नहीं।












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