अमित शाह ने कनीमोझी को किया फोन, सीएम भाई स्टालिन को सता रहा इस बात का डर
नई दिल्ली, 14 फरवरी: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके पार्टी को भाजपा और केंद्र सरकार के मुखबर विरोधियों में गिना जाता है। वहीं इन दिनों तमिलनाडु की एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र के बीच नीट को लेकर भी तनातनी चल रही है। इस बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने दिल्ली से चेन्नई तक सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। दरअसल एक फोन कॉल को लेकर चर्चा है, जो बीते महीने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से डीएमके सांसद एम कनीमोझी को किया गया था।

अमित शाह ने 5 जनवरी को द्रमुक सांसद कनिमोझी के 54वें जन्मदिन के मौके पर उनको फोन किया था। इसी दौरान डीएमके नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से राज्य के लिए छूट देने वाले विधेयक पर चर्चा करने के लिए गृह मंत्री शाह से समय मांग रहा था लेकिन शाह उनको समय नहीं दे रहे थे। एक दिन बाद यानी 6 जनवरी को तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने राज्य विधानसभा में अमित शाह पर बरसते हुए कहा था कि उनकी पार्टी के लोगों को समय ना देना अलोकतांत्रिक कदम है। बाद में 17 जनवरी को डीएमके सांसदों की मीटिंग अमित शाह से हो सकी थी।
बताया गया है कि कनिमोझी के सौतेले भाई, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन बहन के पास आए अमित शाह के फोन को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। उनको और डीएमके के दूसरे वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि ये सिर्फ जन्मदिन की मुबारकबाद देने के लिए किया गया एक शिष्टाचार कॉल नहीं था। डीएमके नेता इसमें कोई राजनीतिक अर्थ ढूंढ़ रहे हैं। इसकी वजह है कि ये शाह का ये कॉल तब आया जब नीट विधेयक पर तमिलनाडु सरकार और केंद्र आमने-सामने हैं। डीएमके के कुछ नेता इस कॉल में डीएमके और करुणानिधि परिवार में फूट की गुंजाइश तलाश रहे हैं।
नीट को लेकर है विवाद
तमिलनाडु की एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार बीते साल सितंबर में तमिलनाडु को मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से छूट देने वाला विधेयक लेकर आई थी। जिसे राज्य विधानसभा ने पास कर दिया गया था। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने इस विधायक को हाल ही में राज्य विधानसभा को लौटा दिया है। जिसको लेकर केंद्र की मोदी सरकार और तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के बीच तनातनी देखने को मिल रही है।












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