राहुल की अयोग्यता के बीच बीजेपी का केरल के लिए बड़ा प्लान, ईसाइयों के लिए जो कभी नहीं किया अब करेगी
भाजपा ने केरल में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए खास रणनीति अपनाने का फैसला किया है। अब वह ईसाइयों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए उनके त्योहारों पर उनके घर पहुंचेगी।

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक के बाद दक्षिण के जिस राज्य में विस्तार का सबसे बड़ा टारगेट सेट कर रखा है, वह केरल है। लेकिन, उसे पिछले एक-डेढ़ दशकों से पूरी ताकत झोंकने के बावजूद चुनावी राजनीति में वहां ऐसी सफलता नहीं मिल सकी है, जिसे कि वह अपने बढ़ते प्रभाव के तौर पर गिना सके। केरल बीजेपी और संघ परिवार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण राज्य है, क्योंकि यहां कि राजनीति में अल्पसंख्यकों का ही ज्यादा दबदबा दिखता रहा है। कांग्रेस हो या सीपीएम गठबंधन, जिनके पक्ष में ईसाई और मुसलमानों का समीकरण सेट होता है, उसी की सरकार बनती है। बीजेपी अब इस पैटर्न में खुद को भी फिट करना चाहती है। इसलिए वह यहां ईसाइयों का दिल जीतने के लिए वह सबकुछ कर रही है, जो आमतौर पर उसकी विचारधारा से मेल नहीं खाती।

भाजपा का केरल के लिए बड़ा अभियान
केरल में बीजेपी के पक्ष में उतरे एक आर्क बिशप के बयान ने पार्टी को गदगद कर दिया है। पार्टी राज्य में ईसाई समुदाय को अपने साथ जोड़ने के लिए वह सारे जतन कर रही है, जो अबतक नहीं करती दिखती थी। बीजेपी आने वाले ईस्टर त्योहार पर राज्य में ईसाई समुदाय के लोगों के घरों तक जाने की योजना बना रही है। क्रिसमस के अवसर पर गिफ्ट के रूप में केक वितरित करने जैसी पहल करने का प्रयास कर रही है। पार्टी ऐसे समय में केरल के एक लाख ईसाई परिवारों के बीच पहुंचने की योजना पर काम कर रही है, जब राज्य की वायनाड सीट से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सदस्यता आपराधिक मानहानि केस में सजा होने के बाद रद्द हो चुकी है।

ईस्टर पर ईसाइयों के घर पहुंचेगी बीजेपी
9 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से केरल में यह बड़ी पहल (ईसाई समाज के लोगों के घर जाकर उनके त्योहार में शामिल होने का प्रयास) की जा रही है, जिसमे ईसाई समाज के लोगों से संपर्क बढ़ाने की तैयारी है। केरल ऐसा राज्य है, जहां अल्पसंख्यकों की राजनीति करके कभी कांग्रेस की अगुवाई वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और कभी सीपीएम की अगुवाई वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सत्ता में आता रहा है। पिछले कुछ समय से केरल मे ईसाइयों के एक वर्ग में भाजपा के लिए जिस तरह का समीकरण बन रहा है, वह 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है।

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विषु पर्व पर ईसाइयों को घरों में आमंत्रित करने की योजना
भाजपा सिर्फ अपने कैडर को केरल में ईसाइयों के त्योहारों पर उनके घरों में भेजने की तैयारी में नहीं है। बल्कि,पार्टी के प्रदेश प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक इसने 15 अप्रैल को फसल कटाई के अवसर पर मनाई जाने वाली विषु पर्व के मौके पर उन्हें हिंदू कार्यकर्ताओं के घरों में आमंत्रित करने की योजना भी बना रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक केरल में हिंदुओं की जनसंख्या 54.73%, मुसलमानों की 26.6% और ईसाइयों की 18.4% थी। इस तरह से पार्टी बहुसंख्यक आबादी को एक बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के साथ लाने के प्रयास में है।

कांग्रेस-लेफ्ट की राजनीति की बीजेपी ने निकाली काट
केरल में अभी तक कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ही अल्पसंख्यकों की राजनीति करते रहे हैं। भाजपा ने हिंदुओं के दम पर केरल में अपनी जड़ें जमाने की बहुत कोशिश की है, उसका जनाधार भी बढ़ा है, लेकिन यह सीटों में नहीं बदल पा रहा है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री और केरल से पार्टी के वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन ने कहा है कि इस तरह के अभियानों का मकसद ईसाइयों के साथ संपर्क जोड़ना है, क्योंकि राज्य में सीपीएम और कांग्रेस दोनों ने हमेशा ही बीजेपी को 'अल्पसंख्यक-विरोधी' दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, 'अब हम उनतक सीधे पहुंच रहे हैं, जिससे वह बीजेपी को पार्टी से ही सीधे जान सकें। और हम उनके साथ जुड़ सकते हैं।'

एक आर्क बिशप ने भाजपा को समर्थन देने की कही है बात
भाजपा पहले ही देश के ऐसे 150 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर 2024 के चुनावों के हिसाब से ज्यादा फोकस कर रही है, जिसपर अल्पसंख्यकों का अच्छा-खासा प्रभाव है। मुख्य रूप से यह देश की कई मुस्लिम बहुल सीटें हैं। लेकिन, केरल और उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में उसका फोकस ईसाई समुदाय पर ज्यादा है और हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उसे इसका फायदा भी मिला है। जहां तक केरल की बात है, तो हाल ही में उत्तर केरल के एक रोमन कैथोलिक चर्च के आर्क बिशप के बयान से काफी कुछ संकेत मिलता है। थालास्सेरी स्थित चर्च के आर्क बिशप मार जोसेफ पैम्पलैनी ने कहा है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी ईसाइयों के लिए अछूत नहीं हो सकती है। अगर केंद्र सरकार रबड़ किसानों की तकलीफ दूर करती है तो वह पार्टी को केरल से पहली लोकसभा सीट देने को तैयार हैं। (तस्वीरें- फाइल)












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