महाराष्ट्र में भाजपा दिन में सपने देखना बंद करे, चौंका सकता है मध्य प्रदेश: शिवसेना

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मचे सियासी घमासान के बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में छपे संपादकीय में भाजपा पर तीखा हमला किया है। शिवसेना महाराष्ट्र में अपनी सरकार को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और उसका मानना है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्तव में महाराष्ट्र सरकार मजबूत और अभेद्य है। सामना के संपादकीय में मध्य प्रदेश के सियासी संकट के लिए कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इसमे कहा गया है कि पार्टी ने अपने युवा नेताओं की महत्वकांक्षाओं को नजरअंदाज किया।

भाजपा दिन में सपने देखना बंद करे

भाजपा दिन में सपने देखना बंद करे

महाराष्ट्र में किसी भी तरह की उठापटक से इनकार करते हुए संपादकीय में लिखा गया है कि भाजपा को महाराष्ट्र में दिन में सपने देखना बंद कर देना चाहिए और याद रखना चाहिए कि जैसा कि हाल ही में उन्हें बड़ा झटका लगा था वैसा ही झटका मध्य प्रदेश में भी लग सकता है। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए हैं, उनके अलावा 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया है, जिसके चलते महज 14 महीने की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

दरकिनार करना सही नहीं

दरकिनार करना सही नहीं

जिस तरह से सिंधिया भाजपा में सामिल हुए उसको लेकर शिवसेना ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और कहा कि हालांकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व की धुरी हैं लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता को पूरी तरह से दरकिनार कर देना बिल्कुल सही नहीं है। भाजपा पर हमला बोलते हुए शिवसेना ने कहा कि पिछले वर्ष भाजपा ने सिंधिया को हराने में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी और अब उनका खुले हाथों से पार्टी के भीतर स्वागत किया जा रहा है। कमलनाथ भी मंझे हुए और कद्दावर नेता हैं और वह इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे। जिस तरह का राजनीतिक ड्रामा महाराष्ट्र में हुआ था लेकिन अंतिम फैसले ने सबको चौंका दिया था, कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश में भी हो सकता है। महाराष्ट्र सरकार पर शिवसेना ने कहा कि महा विकास अघाड़ी की सरकार मजबूत और अभेद्य है, यहां किसी भी तरह की दुष्ट चींटी के आने की जरूरत नहीं है।

राजस्थान के भी हाल मध्य प्रदेश जैसे हो सकते हैं

राजस्थान के भी हाल मध्य प्रदेश जैसे हो सकते हैं

शिवसेना ने कहा कि जब वरिष्ठ नेता फेल होते हैं तो युवा नेताओं को आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत आपस में भिड़ रहे हैं। अगर इसका हल नहीं निकाला जाता है कि राजस्थान में भी मध्य प्रदेश जैसे हालात हो सकते हैं। गौरतलब है कि आठ महीने पहले सिंधिया ने भाजपा की आलोचना की थी और भाजपा को लोकतंत्र का हत्यारा कहा था जब भाजपा ने कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की सरकार को गिरा दिया था। शिवसेना ने कहा कि 15 दिन पहले सिंधिया ने भाजपा की आलोचना की और पार्टी के खिलाफ भाषण दिया लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद वो कह रहे हैं कि कांग्रेस पहले जैसी पार्टी नहीं रही। सिंधिया की क्या मांग थी, मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनना या फिर राज्य सभा का टिकट, अगर दोनों में से कोई एक मांग मान ली जाती तो इस तरह के हालात नहीं होते।

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