तो क्या नीतीश-लालू जैसी होगी अमर-मुलायम की दोस्ती?
बैंगलोर। कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, यहां दोस्त कब दुश्मन बन जाये और दुश्मन कब दोस्त कुछ कहा नहीं जा सकता है। यहां किसी को भूलाया भी बहुत जल्दी जाता है और मतलब के लिए गलतियों को माफ भी बहुत जल्दी कर दिया जाता है। आप समझ गये होंगे कि हमारा इशारा किसकी और है..जी हां हम बात कर रहे हैं रालोद नेता ठाकुर अमर सिंह और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की।
अमर-मुलायम: कब के बिछड़े हुए हम आज कहां. आकर मिले...
सोमवार शाम अचानक से खबर आयी कि अमर सिंह को सपा मुखिया ने फोन किया है और फोन पर पंडित जनेश्वर पार्क के उद्घाटन के मौके समारोह में आने का निमंत्रण दिया है जिसे अमर सिंह ने बड़े प्यार से स्वीकार लिया है। जिसके बाद लोगों के दिलों में एक ही सवाल हिचकोले मारने लग गया कि क्या फिर से अमर सिंह और मुलायम एक हो जायेंगे और दोस्ती का वो कारवां जो चार साल पहले ध्वस्त हो गया था फिर से जन्म ले लेगा।
कौन है अमर सिंह.. मुलायम के हमसाये या अमिताभ के हनुमान.?
हालांकि न्यूज चैनल पर बात करते हुए अमर सिंह ने कहा कि यह एक सरकारी कार्यक्रम है, जिसमें शामिल होने के लिए मुझे मुलायम सिंह ने बुलाया है, इसलिए इस बात को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए लेकिन अमर सिंह जी, शायद आप भूल गये हैं कि आप ही तो अपनी हर बात को तूल देते हैं, तो हम भला कैसे ना दें? जिन मुलायम सिंह के लिए आपने बीते चार सालों में सिवाय जहर के कुछ नहीं उगला, उन्होंने अचानक से ऐसा फोन पर क्या कह दिया कि आप आने को तैयार हो गये।
जया को लेकर हुआ मुलायम और अमर सिंह का झगड़ा
आखिर अमर सिंह के इस नरम रवैये का असल कारण क्या है क्योंकि बीते चार सालों में सपा ने कई सरकारी कार्यक्रम आयोजित किये हैं लेकिन किसी में भी आप सादर आमंत्रित नहीं हुए फिर अचानक से आज ऐसा क्या हो गया जो सारी कड़वाहट मिट गई औऱ आप ने मुलायम सिंह का निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
राजनैतिक समीक्षकों की नजर में अमर-मुलायम का साथ राजनीति की बिसात पर एक नई चाल है। दोनों का साथ आना बहुत कुछ कहता है। इस समय यूपी के जो हालात है उसके मुताबिक सपा के खिलाफ प्रदेश में माहौल है। यह सपा और मुलायम की किस्मत है कि यूपी में सपा पूरे बहुमत में हैं वरना यूपी का हाल भी बिहार की राजनीति जैसा ही होता।
शायद प्रदेश में बीजेपी और अमित शाह की बढ़ती ताकत और कांग्रेस की दुर्दशा के चलते मुलायम सिंह एक बार फिर से अपने पुराने साथी पर भरोसा करना चाह रहे हैं।
भाजपा को रोकने के लिए जिस तरह से एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन लालू और नीतीश एक साथ हो गये हैं, ठीक उसी तरह से मुलायम सिंह भी अपनी चाल चल रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मोदी के रथ को यूपी में रोकने के लिए उन्हें एकजुट होकर ही काम करना होगा क्योंकि जिस तरह से सपा का लोकसभा चुनाव में पोस्टमार्टम ( मात्र 27 सीट) हुआ है, वो ही हाल यूपी विधानसभा चुनाव में भी हो सकता है।
और भी बहुत कुछ इशारा करता है अमर-मुलायम का यराना, नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये और जानिए आगे का हाल..

आजम खां का क्या होगा?
अगर अमर सिंह की सपा में वापसी होती है तो प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खां का क्या होगा जिनका अमर सिंह से 36 का आंकड़ा है।

तो क्या जयाप्रदा की भी वापसी होगी?
अमर सिंह की अहम दोस्त अभिनेत्री जया प्रदा ने मुश्किल वक्त में भी अमर सिंह का साथ नहीं छोड़ा, यदि सच में अमर सिंह अगर सपा में वापस आते हैं तो क्या जयाप्रदा भी फिर से सपा की नेता बनेंगी।

क्या होगा अजीत सिंह का?
लोकसभा चुनाव में अमर सिंह और जयाप्रदा ने अजीत सिंह की पार्टी रालोद से हाथ मिलाया था। अगर अमर सिंह सपा में आते हैं तो उन्हें अजीत सिंह का साथ छोड़ना होगा। या यह भी हो सकता है कि अजीत सिंह भी कांग्रेस का साथ छोड़कर सपा के साथ मिलालें और यह सब एक तय रणनीति के ही तहत हो रहा है।

कांग्रेस डूबता जहाज
लोकसभा चुनावों में जिस तरह से कांग्रेस ने मुंह की खायी है, उस हिसाब से अवसरवादी पार्टी कही जाने वाली सपा के पास बीजेपी के खिलाफ खड़े होने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है इसलिए वो गले-शिकवे भूलाकर फिर से अमर सिंह को साथ ला रही है।

अमित शाह और मोदी के खिलाफ पैंतरा
मुलायम जानते हैं कि अगर वो तय रणनीति के तहत अपनी चाल नहीं चलेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब यूपी की सत्ता उनके हाथ से चली जायेगी इसलिए वो अमित शाह और मोदी के रथ को रोकने के लिए अपने पुराने साथी को करीब लाने की फिराक में हैं ठीक उसी तरह से जिस तरह से बिहार में नीतीश-लालू, मोदी के खिलाफ एक हो गये हैं।












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