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नृत्यगोपाल दास: 27 साल की उम्र में लिया संन्यास, 28 साल बाद किए रामलला के दर्शन

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी थी। उस दौरान मंच पर उनके साथ बैठे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। नृत्यगोपाल दास को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिस वजह से उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। आइए जानते हैं कौन है महंत नृत्यगोपाल दास।

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    27 साल की उम्र में लिया संन्यास

    27 साल की उम्र में लिया संन्यास

    महंत नृत्यगोपाल दास का जन्म 1938 में मथुरा में हुआ था। 27 साल की उम्र में वो संन्यास लेकर महंत बन गए। इसके बाद उन्हें राम दास छावनी का पीठाधीश्वर बनाया गया। राम दास छावनी अयोध्या के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। इसी बीच राम मंदिर का आंदोलन शुरू हो गया। जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि न्यास का गठन किया। इसकी भी जिम्मेदारी महंत नृत्यगोपाल दास को ही दी गई। जन्म स्थान मथुरा में होने के कारण उनका वहां से लगावा बहुत है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास की भी जिम्मेदारी महंत नृत्यगोपाल के पास ही है।

    बाबरी विध्वंस के आरोपी

    बाबरी विध्वंस के आरोपी

    महंत नृत्यगोपाल दास का नाम बाबरी विध्वंस में भी सामने आया था। उन्हें सीबीआई ने मामले में आरोपी भी बनाया और लखनऊ की कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। दिसंबर 1992 में जब कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया था, तो उससे पहले महंत नृत्यगोपाल ने रामलला के दर्शन किए थे। उसके बाद वो कभी भी रामजन्मभूमि नहीं गए। पिछले साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के पक्ष में फैसला सुनाया। फिर मई 2020 में 28 साल बाद महंत नृत्यगोपाल दास ने रामजन्मभूमि पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। दशकों तक महंत नृत्यगोपाल ने राम मंदिर आंदोलन के संरक्षक की भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में राम मंदिर के लिए जमकर चंदा भी मिला। जिस वजह से फैसला आने के पहले भी पत्थर तरासने का काम जारी था।

    सड़क से लेकर कोर्ट तक सक्रिय

    सड़क से लेकर कोर्ट तक सक्रिय

    दिगंबर अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास और मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास, दो नाम ऐसे हैं, जिन्होंने राम मंदिर के लिए सड़क से लेकर कोर्ट तक मेहनत की। राम जन्म भूमि को मुक्त करवाने के लिए उन्होंने राम-जानकी रथ यात्रा में हिस्सा लिया था। कहा जाता है कि महंत परमहंस कोर्ट में काफी सक्रिय रहते थे, जबकि नृत्यगोपाल दास संतों और कारसेवकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाते थे। 30 अक्टूबर 1990 की कारसेवा में महंत नृत्यगोपाल दास ने ही कारसेवाओं का नेतृ्त्व किया था। उन्होंने संतों के साथ कई बार राम मंदिर निर्माण के लिए देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से मुलाकात भी की।

    अब कैसी है तबीयत?

    अब कैसी है तबीयत?

    महंत नृत्यगोपाल दास जन्माष्टमी के चलते दो-तीन दिन के लिए मथुरा के प्रवास पर थे। गुरुवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इस दौरान उन्हें सर्दी, बुखार की भी शिकायत थी। आनन-फानन में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका कोविड-19 टेस्ट करवाया। जिसकी रिपोर्ट अब पॉजिटिव आई है। फिलहाल उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। साथ ही उनको सांस लेने में दिक्कत के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।

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