जानिए उन 20 जांबाजों के बारे में जिन्होंने चीनी सैनिकों से लड़ते हुए दी शहादत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में भारत की संप्रभुता पर कोई आंच नहीं आई है। शुक्रवार को उन्होंने यह बात भारत-चीन सीमा पर 15 जून को हुई घटना के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'न वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।' पीएम मोदी ने आगे कहा, 'लद्दाख की गलवान घाटी में हमारे 20 जांबाज शहीद हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता की तरफ आंख उठाकर देखा था, उन्हें वो सबक सिखाकर गए।' उनके इस बयान के बाद अब सरकार पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इन्हीं सवालों के बीच में आइए एक बार फिर उन 20 बहादुरों को याद करते हैं जिन्होंने जाबांजी के साथ चीनी जवानों से लड़ाई की और भारतमाता की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि 15 जून को हुई घटना में जो 20 सैनिक मारे गए हैं उनमें से ज्यादातर 20 से 29 वर्ष की आयुवर्ग के थे।

कर्नल संतोष बाबू
37 साल कर्नल बीकुमल्ला संतोष बाबू 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) थे। कर्नल संतोष बाबू साल 2004 में कमीशंड हुए थे और उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर थी।वह तेलंगाना के सूर्यपेट जिले के रहने वाले थे। कर्नल बाबू हमेशा से ही सेना में जाना चाहते थे और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए आंध्र प्रदेश के विजियांगराम जिले में स्थित सैनिक स्कूल में एडमिशन लिया। 12वीं तक की पढ़ाई कर्नल बाबू ने अपनी पढ़ाई रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले इसी सैनिक स्कूल से पूरी की।

हवलदार सुनील कुमार
पटना के बिहटा में तारा नगर के शिकरिया के रहने वाले हवलदार सुनील कुमार साल 2002 में सेना में शामिल हुए थे। 35 साल के सुनील जल्द ही छुट्टी लेकर घर लौटने वाले थे। सुनील ने छह जून को अपनी पत्नी प्रीति देवी से बात की थी। उनकी मां रुक्मिणी देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले फोन पर उससे मेरी बात हुई थी। उसने कहा था कि मां जल्द ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा। उनके पिता (वासुदेव साह) लकवाग्रस्त हैं। हवलदार सुनील कुमार तीन बच्चों के पिता थे।

लांस नायक दीपक कुमार
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले 21 साल के दीपक कुमार की शादी आठ माह पहले ही हुई थी। रीवा जिले के मनगवां के ग्राम फरेहदा के रहने वाले दीपक ने घरवालों से वादा किया था लॉकडाउन हटते ही वह घर आएंगे। उनके घर में उनकी पत्नी के अलावा पिता, माता और दादी हैं। दादी अपने पोते का इंतजार कर रही हैं। सेना के अधिकारियों की तरफ से उनकी शहादत की जानकारी पिता को मंगलवार रात फोन पर दी गई थी। सिर्फ 21 साल की उम्र में जवान बेटे की शहादत की खबर से घर से लेकर गांव तक में मातम छा गया।
Recommended Video

सिपाही गणेश कुंजाम
27 साल के सिपाही गणेश कुंजाम छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कुरुटोला गांव से आते थे। यह वही जिला है जहां पर सबसे ज्यादा नक्सली वारदात होती है। वह इस वर्ष जनवरी में अपने घर आए थे। सिपाही गणेश ने अपनी छुट्टियों के दौरान अपनी शादी भी तय कर ली थी। उनकी पोस्टिंग एक माह पहले ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर पोस्टिंग एक माह पहले ही हुई थी। बेहद गरीब परिवार से आने वाले गणेश अपने माता-पिता के इकलौती बेटे थे। उन्होंने 12वीं कक्षा के बाद ही साल 2011 में आर्मी ज्वॉइन कर ली थी। कोरोना वायरस महामारी की वजह से उनकी शादी की तारीख तय नहीं हो सकी थी।

सिपाही अमन कुमार
27 साल के सिपाही अमन कुमार बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले थे। वह जिले के सुल्तानपुर गांव के निवासी सुधीर कुमार सिंह के बेटे थे। अमन की शादी को एक साल ही हुआ था। उनकी शहादत की खबर जैसे ही उनकी पत्नी को मिली वह सदमे में आ गईं। अमन के माता-पिता समेत परिवार में किसी को भी यकीन नहीं हो पा रहा है कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

सिपाही गुरतेज सिंह
23 साल के सिपाही गुरतेज सिंह भी गलवान घाटी में शहीद हो गए हैं। शहीद गुरतेज पंजाब के मानसा गांव वीरे वाला डोकरा के रहने वाले थे। उनके भाई की शादी सोमवार को ही थी और घर में शादी का जश्न चल रहा था। भाई गुरप्रीत को सेना अधिकारियों की तरफ से जश्न के दौरान ही लाडले छोटे भाई की शहादत की सूचना दी गई थी। गुरतेज बॉर्डर पर टेंशन और कोरोना वायरस महामारी के चलते वह शादी में शामिल नहीं हो सके।

सिपाही कुंदन कुमार ओझा
बिहार के साहेबगंज जिले के रहने वाले 32 साल के कुंदन की शहादत की खबर से हर कोई सदमे में है। मंगलवार रात परिवार को उनकी शहादत के बारे में बताया गया। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बस उनकी फोटो देखकर रोती रहती हैं। 18 दिन पहले कुंदन दूसरी बेटी के पिता बने थे लेकिन अपनी बेटी का चेहरा देखे बिना ही चले गए। उनकी 11 साल की एक बेटी और है। वह साल 2011 में सेना में शामिल हुए थे। उनकी नवजात बेटी का नाम दिशा है और उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि जैसे टेंशन खत्म होगी वह बेटी को देखने घर आएंगे।

सिपाही गणेश हांदसा
झारखंड के बहरागोड़ा ब्लॉक के कोसाफलिया निवासी 21 साल के गणेश हांसदा भी गलवान घाटी में शहीद हो गए। शहीद गणेश के परिजन के अनुसार, मंगलवार रात उन्हें लेह से फोन आया था और इसकी सूचना दी गई थी। शहीद गणेश के बड़े भाई दिनेश हांसदा ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले गणेश की घरवालों से बात हुई थी। उसने कहा था कि सब ठीक है। गणेश के परिवार वाले मनरेगा स्कीम के तहत मजदूरी का काम करते हैं।

सिपाही अंकुश ठाकुर
गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के 21 साल के अंकुश ठाकुर भी शहीद हो गए हैं। शहीद अंकुश भोरंज के गांव कड़होता के रहने वाले थे। अंकुश की शहादत की खबर सेना मुख्यालय से ग्राम पंचायत कड़ोहता को फोन द्वारा दी गई। इसके बाद हमीरपुर जिले में शोक की लहर दौड़ गई। पूरा जिला गमगीन हो गया। शहीद जवान अंकुश ठाकुर साल 2018 में पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। इनके पिता और दादा भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। शहीद अंकुश का छोटा भाई छठीं क्लास का स्टूडेंट है। 10 माह पहले ही अंकुश ने ट्रेनिंग पूरी कर सेना की नौकरी ज्वाइन की

सिपाही जय किशोर सिंह
भारत-चीन के सैनिकों के बीच सोमवार रात लद्दाख की गलवान वैली में हुई हिंसक झड़प में वैशाली जिले के जवान जय किशोर सिंह शहीद हुए थे। जंदाहा थाना क्षेत्र के चकफतेह गांव के रहने वाले जय किशोर दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। शहीद जवान जय किशोर की अभी शादी नहीं हुई थी।जय किशोर चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके बड़े भाई नंद किशोर भी सेना के जवान हैं। जय किशोर के पिता राज कपूर सिंह किसान हैं। जय किशोर 2018 में सेना में भर्ती हुए थे। जय किशोर की शहादत की खबर मिलने के बाद से गांव में मातम है।

सिपाही चंद्रकात प्रधान
ओडिशा के कंधमाल जिले के रहने वाले 28 साल के सिपाही चंद्रकात प्रधान ने भी गलवान में दुश्मन से लड़ते हुए अपनी जान दे दी। इस वर्ष फरवरी में ही उन्हें लेह में पोस्टिंग मिली थी। एक जून को उन्होंने अपनी बहन से फोन पर बात की थी। बहन से सिपाही चंद्रकात ने कहा था, 'अगर मैंने तुम्हें कभी दुख पहुंचाया हो तो मुझे माफ कर देना।' इसके साथ ही उन्होंने बहन से परिवार का ध्यान रखने को कहा था। बहन की मानें तो वह उनसे बात करते हुए फोन पर काफी रो रहे थे।

नायब सूबेदार नूदूराम सोरेन
झारखंड के मयूरभंज जिले के रहने वाले 43 साल के नायब सूबेदार नोदूराम सोरेन यहां के एक पिछले गांव के रहने वाले थे। सन् 1997 में उन्होंने आर्मी ज्वॉइन की थी। उनकी शहादत की जानकारी उनकी पत्नी और तीन बेटियों को नहीं दी गई थी। उनके भाई को फोन करके इस बारे में जानकारी दी गई थी।

हवलदार बिपुल रॉय
लद्दाख में गलवान घाटी में सोमवार की रात चीन के साथ हुई खूनी झड़प में मेरठ के रहने वाले 35 साल के हवलदार बिपुल रॉय भी शहीद हो गए। उनके शहीद होने की सूचना बुधवार को उनके परिजनों को मिली तो घर पर मातम पसर गया। आस पड़ोस के लोग शहीद की पत्नी को सांत्वना देने के लिए पहुंचने लगे। बिपुल रॉय मूल रूप से वेस्ट बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के बिंदीपारा गांव के रहने वाले थे। उन्होंने वर्ष 2003 में भारतीय फौज ज्वॉइन की थी।

हवलदार के पलानी
तमिलनाडु के रामनाथपुरम के रहने वाले 40 वर्षीय जवान के पलानी भी शहीद हो गए। उन्होंने लोन लेकर घर बनवाया था। देश की रक्षा के लिए 3 जून को अपने जन्मदिन की पार्टी और गृह प्रवेश का समारोह भी छोड़ दिया था। घरवाले उनके आने का इंतजार कर रहे थे। वो एक साल के अंदर रिटायरमेंट लेकर नए घर में परिवार के साथ रहने जाने वाले थे, लेकिन 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन सेना के बीच हुई झड़प में वो शहीद हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 जून को के. पलानी का जन्मदिन था। वो 40 वर्ष के हुए थे। के पलानी ने आखिरी बार अपनी पत्नी से फोन पर एक जून को बात की थी।

नायब सूबेदार सतनाम सिंह
लद्दाख में सीमा पर चीनी सैनिकों के साथ झड़प में पंजाब के गुरदासपुर के नायब सूबेदार सतनाम सिंह का भी शहीद हो गए। शहादत की खबर के बाद पूरे गांव ही नहीं, आसपास के इलाके और पूरे पंजाब में शोक की लहर है। 42 साल के सतनाम सिंह दो बच्चों के पिता थे और उनका छोटा भाई सुखचैन सिंह भी फौज में है। भाई इस समय हैदराबाद में पोस्टेड है।

नायब सूबेदार मनदीप सिंह
पंजाब के पटियाला के गांव सील के नायब सूबेदार मनदीप सिंह बहुत बहादुरी के साथ लड़े थे। मनदीप सिंह किसी के रोके नहीं रुक रहे थे। दुश्मन सैनिकों का खात्मा करते हुए वह लगातार आगे बढ़ रहे थे। शहीद के चचेरे भाई जो कैप्टन (रिटायर) निर्मल सिंह बताया कि शहीद मनदीप सिंह की टीम में शामिल एक जवान ने उन्हें बताया है कि वह बहुत बहादुरी के साथ चीनी सैनिकों से लड़े थे। कैप्टन निर्मल सिंह 30 अप्रैल को सेवामुक्त होकर उसी पोस्ट से लौटे हैं, जहां मनदीप शहीद हुए हैं।

सिपाही गुरबिंदर सिंह
पंजाब के संगरूर के रहने वाले सिपाही गुरबिंदर सिंह की सगाई पिछले साल हुई थी, परिवार शादी के लिए उनके छुट्टी पर लौटने का इंतजार कर रहा था। 22 साल के जवान गुरबिंदर सिंह चीन के साथ लद्दाख इलाके की गलवान वैली में हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। सिपाही गुरबिंदर सिंह की इस साल के आखिर में शादी होनी थी लेकिन 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में वह देश के लिए शहीद हो गए।

सिपाही कुंदन कुमार
15 जून को सोमवार को हुई झड़प में बिहार के 27 साल के सिपाही कुंदन कुमार भी शहीद हो गए। कुंदन कुमार बिहार के सहरसा जिले के बिहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत आरन गांव के रहने वाले थे। झड़प में जान गंवाने की खबर के बाद उनके परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, कुंदन कुमार के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। उनके बेटे ने राष्ट्र के लिए अपना बलिदान दिया। उनके दो पोते हैं और अब वह उन्हें भी सेना में भेजेंगे।

सिपाही चंदन कुमार
भोजपुर के जगदीशपुर प्रखंड के कौरा पंचायत के ज्ञानपुरा गांव के रहने वाले सिपाही चंदन कुमार हिंसक झड़प में शहीद हो गए। 24 साल के चंदन चार महीने पहले ही अपने गांव आए थे। उनके चचेरे भाई जितेन्द्र ने बताया कि चंदन चार भाई हैं और उनके सबसे बड़े भाई देव कुमार सिंह, मंझले संजीत कुमार, उससे छोटे गोपाल सिंह सभी सेना में हैं। चंदन सबसे छोटा था। मंगलवार रात फोन आया था लेकिन परिवार में पिताजी फोन नहीं रिसीव कर पाए तो सुबह उसकी शहादत की सूचना मिली। चंदन साल 2018 में सेना में शामिल हुए थे।

सिपाही राजेश ओरांग
गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों में सिपाही राजेश ओरांग का भी नाम है। 26 साल के बेटे की 'शहादत' की खबर मिलने के बाद से राजेश के पिता बिस्तर पर ही हैं। सेना मुख्यालय से बुधवार शाम पांच बजे के आसपास राजेश के पिता सुभाष के पास फोन आया। सिपाही राजेश पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रहने वाले थे। राजेश अपने परिवार में पहले ऐसे शख्स थे जो सेना में शामिल हुए थे। उनके परिवार में माता-पिता के अलावा दो छोटी बहनें हैं। उन्होंने पांच साल पहले यानी साल 2015 में आर्मी ज्वॉइन की थी।












Click it and Unblock the Notifications