अटैक हेलीकॉप्‍टर Apache जो रात में उड़ा सकता है पाकिस्‍तान के होश, IAF का एक खतरनाक हथियार

नई दिल्‍ली। दुनिया का सबसे एडवांस्‍ड अटैक हेलीकॉप्‍टर अपाचे आज आधिकारिक तौर पर इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) का हिस्‍सा बन गया। यह हेलीकॉप्‍टर पाकिस्‍तान बॉर्डर से बस 30 किलोमीटर पठानकोट पर तैनात किया गया है। आईएएफ चीफ, एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजूदगी में इस हेलीकॉप्‍टर को आईएएफ को सौंपा गया। इस हेलीकॉप्‍टर को आईएएफ ने उसी पठानकोट पर तैनात किया है जिसे जनवरी 2016 में पाकिस्‍तान से आए आतंकियों ने निशाना बनाया था। आठ अपाचे हेलीकॉप्‍टर अब पाकिस्‍तान से चंद किलोमीटर दूर है। यानी अगर पड़ोसी ने कोई हरकत की तो इस बार सबसे खतरनाक हथियार से आईएएफ जवाब देने के लिए तैयार है। आइए आपको अपाचे की खूबियों के बारे में बताते हैं।

हर मौसम में उड़ान भर सकता है अपाचे

हर मौसम में उड़ान भर सकता है अपाचे

अपाचे को अपाचे गार्डियन हेलीकॉप्‍टर के नाम से भी जाना जाता है। एएच-64ई (I) अपाचे गार्डियन एक एडवांस्‍ड और हर मौसम में हमला करने की क्षमता से लैस हेलीकॉप्‍टर है जिसे जमीन के अलावा हवा में मौजूद दुश्‍मन पर भी हमला करने में प्रयोग किया जा सकता है। यह हेलीकॉप्‍टर कम ऊंचाई पर पेड़ों और पहाड़ों के बीच भी उड़ान भर सकता है और दुश्‍मन को नेस्‍तनाबूद कर सकता है। अफगानिस्‍तान में अपाचे ने अपनी श्रेष्‍ठता को साबित किया है। प्रिंस हैरी इस हेलीकॉप्‍टर को उड़ा चुके हैं। जिस समय प्रिंस हैरी अफगानिस्‍तान में डेप्‍लॉयड थे, उस समय वह इसी हेलीकॉप्‍टर के पायलट थे। प्रिंस हैरी की मानें तो दुश्‍मनों में दहशत पैदा करने के लिए इस हेलीकॉप्‍टर का सिर्फ नाम ही काफी है।

रडार की पकड़ से दूर अपाचे

रडार की पकड़ से दूर अपाचे

बोइंग का अपाचे चार ब्‍लेड वाला और ट्विन इंजन वाला हेलीकॉप्‍टर है। अपाचे दुनिया पहला ऐसा अटैक हेलीकॉप्‍टर है जो रडार की पकड़ से दूर है। इसके कॉकपिट में दो लोगों के क्रू की जगह है।पठानकोट में रूसी हेलीकॉप्‍टर एमआई-35 की एक यूनिट है और इस यूनिट को रिटायर कर दिया है। अब इसकी जगह एडवांस्‍ड हेलीकॉप्‍टर अपाचे की यूनिट आईएएफ के लिए रेडी है। अपाचे में फिट सेंसर की मदद से यह अपने दुश्‍मनों को आसानी से तलाश कर उन्‍हें खत्‍म कर सकता है। साथ ही इसमें नाइट विजन सिस्‍टम भी इंस्‍टॉल हैं।

अपाचे के खतरनाक हथियार

अपाचे के खतरनाक हथियार

अपाचे में 30 मिलिमीटर की एक एम230 चेन गन को मेन लैंडिंग गियर के बीच इंस्‍टॉल किया गया है और यह हेलीकॉप्‍टर की स्‍ट्राइकिंग कैपेसिटी को दोगुना करती है। साल 2020 तक भारत के पास 22 अपाचे का एक बेड़ा होगा। भारत दुनिया का 14वां ऐसा देश बन गया है जो जहां पर सेनाएं अपाचे ऑपरेट कर रही हैं। सितंबर 2015 में भारत सरकार ने अपाचे की खरीद को मंजूरी दी थी। साल 2017 में सेना के लिए अतिरिक्‍त छह अपाचे हेलीकॉप्‍टर्स की खरीद को मंजूरी दी गई थी।

अपाचे की खतरनाक मिसाइल

अपाचे की खतरनाक मिसाइल

अपाचे के चार अहम बिंदु इसके पंखों के ऊपर स्थित हैं। इनमें एक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल और हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स को फिट किया गया है।अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह वॉर जोन में लड़ाई के समय जरा भी फेल न हो। अपाचे दुनिया के उन चुनिंदा हेलीकॉप्‍टर में शामिल है जो किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्‍मन पर हमला कर सकता है।हेलीकॉप्‍टर में इंस्‍टॉल एयरफ्रेम में कुछ का वजन करीब 2,500 पौंड यानी 1,100 किलो है। यह एयरफ्रेम इसे किसी भी बैलेस्टिक हमले से सुरक्षित रखता है।

पहली उड़ान 1975 में

पहली उड़ान 1975 में

अप्रैल 1986 में अपाचे को अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था। अपाचे को सन् 1981 तक एएच-64 नाम से जाना जाता था लेकिन बाद में अपाचे नाम दिया गया। अमेरिकी सेना में उस समय अपने हेलीकॉप्‍टरों का नाम अमेरिकी भारतीय जनजातीय नामों पर रखती थी। अपाचे को अमेरिकी सेना के एडवांस्‍ड अटैक हेलीकॉप्‍टर प्रोग्राम के लिए डेवलप किया गया था। उस समय अमेरिकी सेना एएच-1 कोबरा हेलीकॉप्‍टर को प्रयोग करती थी। अपाचे ने पहली उड़ान 30 सितंबर 1975 को भरी थी।

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