सत्यम घोटाला- रामलिंगा राजू सहित सभी आरोपी फर्जीवाड़े के दोषी करार
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े फर्जीवाड़े में कोर्ट ने रामलिंगा राजू सहित 11 लोगों को दोषी करार दिया है। हैदराबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले से जुड़े सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं इस कोर्ट ने अभी सजा का ऐलान नहीं किया है।

सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत दोषी पाया गया है। रामलिंगा राजू पर धारा 409 के आरोप भी साबित हुए हैं। गौरतलब है कि यह देश का सबसे बड़ा लेखा में धोखाधड़ी का मामला है।
यह मामला 7 जनवरी 2009 को सामने आया था जब सत्यम कंपनी के मालिक फाउंडर और चेयरमैन अध्यक्ष बी रामलिंगा राजू ने कथित तौर पर अपनी कंपनी के बहीखाते में हेराफेरी और वर्षों तक करोड़ों रुपये का मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की बात कबूल की थी।
इस मामले में राजू के भाई रामा राजू को भी रामा राजू और अन्य के साथ कई लोगों को फर्जीवाड़े का दोषी पाया गया है। फर्जीवाड़े की बात कथित तौर पर स्वीकार करने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग ने राजू को गिरफ्तार किया था।
- इस पूरे मामले में 226 गवाहों से पूछताछ हुई।
- जिसमें रामलिंगा राजू के अलावा अन्य आरोपी उनके भाई और सत्यम के पूर्व प्रबंध निदेशक बी रामा राजू से भी पूछताछ हुई।
क्या है सत्यम घोटाला, मामले की संक्षिप्त जानकारी-
- सत्यम के संस्थापक बी. रामलिंगा राजू ने सात जनवरी 2009 को अकाउंट में गड़बड़ी करके करोड़ों रूपए का मुनाफा कमाने की बात मानी।
- सत्यम केस के मुख्य आरोपी बी. रामलिंग राजू उनके छोटे भाई और कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक बी. राम राजू हैं।
- सत्यम में घोटाला 10 करोड़ रुपये के एडजेस्टमेंट के साथ शुरू हुआ लगातार चलता रहा।
- सत्यम ने अपने ग्राहकों से बिक्री रसीद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
- सत्यम के मालिक रामलिंग राजू ने अचल संपत्ति में मोटा पैसा लगाना शुरू कर दिया था।
- इससे भी कुछ लोगों को शक हुआ कि वे आईटी बिजनेस में ध्यान क्यों नहीं दे रहे।
- राजू को 7 जनवरी 2009 को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब उनकी कंपनी में लगभग 8,000 करोड़ रूपए का घपला सामने आया था।
- राजू ने सत्यम के अध्यक्ष के पद से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि उन्होंने कंपनी को डूबने से बचाने के लिए खातों में हेराफेरी की।
- राजू को नवंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर छोड़ दिया था।
- सत्यम घोटाले का सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय ने राजू और उनके परिवार की 34 जायदादों को ज़ब्त किया।












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