Ali Khan Mahmudabad को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारी को लेकर उठे सवाल
Ali Khan Mahmudabad: अशोका विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख और एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 22 मई को उन्हें अंतरिम जमानत देते हुए उनकी गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि और कथनों की मंशा की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन का भी आदेश दिया है।
प्रोफेसर महमूदाबाद को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" को लेकर सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी में राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। "ऑपरेशन सिंदूर" 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया थी।

Ali Khan Mahmudabad पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अली खान के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। पहली, भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता योगेश जठेड़ी द्वारा और दूसरी, हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया द्वारा दर्ज कराई गई। दोनों शिकायतकर्ताओं ने महमूदाबाद के पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह समाज में वैमनस्य फैलाता है और देश की एकता को नुकसान पहुंचाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए यह जरूर कहा कि महमूदाबाद द्वारा उपयोग किए गए शब्दों का चयन उचित नहीं था। हालांकि, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और नागरिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।
Ali Khan Mahmudabad: विश्वविद्यालय और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
इस गिरफ्तारी के बाद अकादमिक जगत, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक नेताओं में भारी असंतोष देखने को मिला। अशोका विश्वविद्यालय की फैकल्टी एसोसिएशन ने महमूदाबाद की गिरफ्तारी को "अकारण और असंगत" करार देते हुए उसकी निंदा की।
विश्वविद्यालय की ओर से एक बयान में कहा गया, "हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को दी गई अंतरिम जमानत से राहत और सुकून महसूस कर रहे हैं। यह उनकी परिवार और हमारे समुदाय के लिए एक बड़ी राहत है।"
Ali Khan Mahmudabad मामले पर NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करते हुए प्रोफेसर महमूदाबाद की गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान संभावित मानवाधिकार उल्लंघन पर रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने कहा, "20 मई की एक मीडिया रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का सार आया है, जिससे prima facie यह लगता है कि प्रोफेसर के मानवाधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है। इसलिए, आयोग ने स्वतः संज्ञान लेने का निर्णय लिया है।"
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार गठित SIT प्रोफेसर महमूदाबाद के बयानों की मंशा और संदर्भ की जांच करेगी। इस बीच, अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया है और वे फिलहाल सोनीपत जिला जेल से बाहर आ चुके हैं। इस प्रकरण को लेकर देशभर में कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। अब सबकी नजरें SIT की जांच और सुप्रीम कोर्ट में आने वाले अगले चरण की सुनवाई पर टिकी हैं।












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