'रेड कार, कैश और कट्टरपंथ',पूछताछ में सामने आई Al Falah University से जुड़ी आतंक की खतरनाक कहानी
Al Falah University Case New Update: अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े व्हाइट कॉलर आतंक मामले में जांच ने ऐसे राज खोले हैं, जो न केवल हैरान करने वाले हैं बल्कि यूनिवर्सिटी के अंदर एक जटिल और गुप्त नेटवर्क की भी जानकारी देते हैं। आरोपी डॉ. शाहीन के बयान के मुताबिक, विश्वविद्यालय में एक खास समूह ने कट्टरपंथी विचारों और छुपे हुए ऑपरेशन की योजना बनाने का काम किया। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क का केंद्र विश्वविद्यालय था और इसमें मुख्य रूप से कश्मीरी फैकल्टी का दबदबा था। गैर-कश्मीरी कर्मचारियों को इस नेटवर्क से बाहर रखा जाता था, ताकि यह समूह पूरी तरह अपने नियंत्रण में रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि मुझम्मिल और उमर जैसे आरोपी लॉजिस्टिक्स और कट्टरपंथी संदेश फैलाने का काम संभाल रहे थे। हथियार, सीसीटीवी उपकरण और विदेश संपर्क जैसी गुप्त गतिविधियाँ इस नेटवर्क की गंभीरता को और बढ़ाती हैं। इसके साथ ही जकात और दान के नाम पर फंडिंग चलाने के आरोप ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है। विश्वविद्यालय के कैंपस को किसी ऑपरेशन के लिए सुरक्षित क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका भी जांच में सामने आई है।

कश्मीरी फैकल्टी का खास नेटवर्क
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय में लगभग 70 प्रतिशत स्टाफ कश्मीरी हैं। डॉ. शाहीन ने बताया कि इसी वजह से कैंपस में एक अलग सांस्कृतिक और भाषाई माहौल बन गया। इस समूह में मुख्य रूप से कश्मीरी स्टाफ ही शामिल था और गैर-कश्मीरी कर्मचारियों को नेटवर्क से बाहर रखा गया।
मुझम्मिल और उमर की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, मुझम्मिल ने लॉजिस्टिक्स संभाली - वाहनों, स्थानांतरण और गोपनीय भंडारण की जिम्मेदारी। वहीं, उमर ने कट्टरपंथी विचार फैलाने और साजिश की योजना बनाने का काम किया। डॉ. शाहीन ने कहा कि उमर ने खुद बताया था कि जल्द ही एक बड़ा हमला होने वाला है।
विदेशी संपर्क और संदिग्ध गतिविधियां
जांच में यह भी पता चला कि कुछ बैरल "सफाई के काम" के नाम पर कैंपस में ले जाए गए। डॉ. शाहीन के अनुसार, ये बैरल किसी गुप्त ऑपरेशन से जुड़े हो सकते हैं। साथ ही, तुर्की और पाकिस्तान से संदिग्ध संपर्क भी सामने आए हैं।
हथियार और सीसीटीवी बरामद
जांच में डॉ. शाहीन और मुझम्मिल से जुड़े बैगों में एक बड़ा और एक छोटा हथियार और सीसीटीवी उपकरण मिले। इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि विश्वविद्यालय को किसी ऑपरेशन के लिए सुरक्षित क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
फंडिंग और जकात का मामला
जांच में यह भी सामने आया कि मुझम्मिल ने जकात और दान के नाम पर फंडिंग नेटवर्क चलाया। डॉ. शाहीन के अनुसार, उन्होंने केवल पैसे प्राप्त किए। लगभग 20-22 लाख रुपये फंडिंग में दिखे, जिसे जांच एजेंसियां आतंक फंडिंग के लिए इस्तेमाल होने का संदेह कर रही हैं।
संदिग्ध समय और अगले कदम
जांच में यह भी पता चला कि मुझम्मिल ने हिरासत से पहले 1 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड मांगा था। हथियार और सीसीटीवी की बरामदगी से जांच एजेंसियों का संदेह और बढ़ा है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और डॉ. शाहीन और मुझम्मिल के संबंध, फंडिंग चैनल और विदेश संपर्क की गहन समीक्षा की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या विश्वविद्यालय परिसर आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहा था।
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