'नफरत फैलाने का काम करती आई है बीजेपी', निशिकांत दुबे के बयान पर सियासत गरम, अखिलेश ने भाजपा को घेरा

Akhilesh Yadav: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश को लेकर दिए गए विवादित बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उन्होंने न सिर्फ अदालत की भूमिका पर सवाल उठाया, बल्कि यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ही सब कुछ तय करेगा, तो फिर संसद और विधानसभाएं बंद कर देनी चाहिए। इस बयान को लेकर जहां विपक्ष ने जमकर निशाना साधा, वहीं खुद भाजपा को भी सफाई देनी पड़ी।

दुबे के इस बयान के बाद विपक्षी दलों को केंद्र सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला तक, सभी ने भाजपा की सोच पर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए बयान को दुबे का निजी विचार बताया और खुद को इससे अलग कर लिया। आइए जानते हैं किसने क्या कहा...

Akhilesh yadav

अखिलेश यादव बोले - BJP की असली सोच सामने आई

प्रयागराज में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि निशिकांत दुबे का बयान किसी एक व्यक्ति की राय नहीं है, बल्कि भाजपा की असली सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा, "धर्म और जाति के नाम पर समाज में नफरत फैलाने का काम बीजेपी लंबे समय से कर रही है। इसके लिए बाकायदा योजनाएं बनाई जाती हैं और फंड भी खर्च किया जाता है।"


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निशिकांत दुबे ने क्या कहा था?

निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा था, "अगर हर फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही लेना है तो संसद और विधानसभा का क्या काम? इन्हें बंद कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अब 'चेहरा देखो, कानून बताओ' की तर्ज पर काम कर रहा है।" उन्होंने अदालत पर "धार्मिक युद्ध भड़काने" का आरोप लगाया और कई पुराने फैसलों पर भी नाराजगी जताई।

बीजेपी ने बयान से बनाई दूरी

बवाल बढ़ते देख भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने कहा, "निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा के बयान उनके निजी विचार हैं। पार्टी इन बयानों से सहमत नहीं है और इन्हें पूरी तरह खारिज करती है।"

फारूक अब्दुल्ला ने दी तीखी प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "लोकतंत्र चार स्तंभों पर टिका होता है-संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया। अगर कोई कानून गलत होता है तो लोग सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं। ऐसे में एक सांसद का इस तरह का बयान देना पूरी तरह से गलत है।"


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