Air India Crash की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल, DGCA से निष्पक्ष जांच के लिए मांगा जवाब
Air India Crash Investigation: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 22 सितंबर को केंद्र सरकार और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से जवाब मांगा कि वे 12 जून को गुजरात में हुए एयर इंडिया फ़्लाइट AI-171 क्रैश की जांच को "स्वतंत्र, निष्पक्ष, और शीघ्र" कैसे पूरा करेंगे।
इस हादसे में टेकऑफ़ के कुछ ही मिनटों बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 230 यात्री, 12 क्रू मेंबर और जमीन पर 19 लोग मारे गए। सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे पर सवाल उठाया कि क्या जांच को एक स्वतंत्र विशेषज्ञ द्वारा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया जाना चाहिए।

अदालत ने दो हफ्तों के भीतर केंद्र और DGCA से जवाब मांगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है।
Supreme Court DGCA inquiry: सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ने केंद्र और DGCA को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्तों में जवाब देने को कहा। यह नोटिस सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने DGCA की ओर से जारी प्रारंभिक रिपोर्ट को "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि टेकऑफ़ के कुछ ही सेकंड बाद ईंधन नियंत्रण स्विच को "RUN" से "CUTOFF" करने के कारण विमान के इंजन की शक्ति में कमी आई, जिससे क्रैश हुआ।
वकील प्रशांत भूषण ने क्या तर्क दिए?
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि हादसे के 102 दिन बीत जाने के बावजूद, अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह हादसा क्यों हुआ, क्या कारण थे और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए क्या कदम उठाए जाएँ। उन्होंने जांच पैनल में हित-संघर्ष (conflict of interest) की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि पाँच सदस्यों में से तीन DGCA के हैं, जिसे इस मामले में लापरवाही के आरोपों के तहत देखा जा रहा है।
भूषण ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को सार्वजनिक करने की मांग भी की, लेकिन बेंच ने कहा, "यह केवल नियमित जांच पूरी होने के बाद ही संभव है। इस समय सब कुछ सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।"
प्रारंभिक रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
भूषण ने यह भी कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट ने पायलटों पर जल्दी से दोषारोपण किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि पायलटों की प्रतिष्ठा और उनके परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि समय से पहले जानकारी लीक होने से सच्चाई बिगड़ सकती है। बेंच ने कहा कि "चुनिंदा लीक की बजाय, जांच का अंतिम परिणाम ही सामने आना चाहिए। जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन पूरी तस्वीर सामने आने तक प्रक्रिया को पूरा होने दिया जाना चाहिए।"
अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की जांचें जल्दी पूरी की जानी चाहिए, ताकि अफवाह या गलतफहमी का लाभ उठाने का मौका किसी को न मिले। एयर दुर्घटनाओं को कभी-कभी प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस द्वारा छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए भी भुनाया जाता है।
बताते चलें कि 12 जून को एयर इंडिया फ़्लाइट AI-171 टेकऑफ़ के तुरंत बाद अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे में 229 यात्री, सभी क्रू मेंबर और जमीन पर 19 लोग मारे गए। कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau of India) ने इस हादसे की जांच में नेतृत्व किया।
- जांच में यूएस नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड, यूके की एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच और बोइंग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
- DGCA की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि टेकऑफ़ के कुछ सेकंड बाद दोनों इंजन के ईंधन नियंत्रण स्विच "RUN" से "CUTOFF" हो गए, जिससे इंजन पावर कम हो गई।
- कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर ने एक पायलट को स्विच कटऑफ पर सवाल उठाते हुए और दूसरे को जिम्मेदारी से इंकार करते हुए रिकॉर्ड किया।
- बैकअप पावर सिस्टम Ram Air Turbine स्वतः सक्रिय हुआ, और जब स्विच को वापस "RUN" किया गया तो एक इंजन ने शक्ति हासिल करना शुरू किया, लेकिन विमान ऊँचाई नहीं प्राप्त कर सका। टेकऑफ़ से पहले Mayday कॉल रिकॉर्ड हुई।
याचिका में और क्या है?
याचिका में यह भी बताया गया कि 2018 में अमेरिकी FAA ने इसी तरह के विमान के ईंधन नियंत्रण स्विच लॉकिंग फीचर में संभावित समस्या को लेकर Special Airworthiness Information Bulletin जारी किया था। यह निर्देश सलाहकार था, अनिवार्य नहीं, इसलिए पालन सुनिश्चित नहीं हुआ।
फाउंडेशन ने कहा कि यह याचिका केवल वर्तमान हादसे के उत्तर खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अनगिनत यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है जो आज भी यह विश्वास रखते हैं कि आकाश सुरक्षित है।
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