Waqf Bill पर AIMPLB का ऐलान, कोर्ट में विधेयक को देंगे चुनौती-किसान आंदोलन की तरह प्रदर्शन
AIMPLB Waqf Bill: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। बोर्ड ने ऐलान किया है कि वह इस विधेयक को कोर्ट में चुनौती देगा और इसे वापस लेने के लिए किसान आंदोलन की तर्ज पर देशव्यापी प्रदर्शन करेगा।
AIMPLB के सदस्य मोहम्मद अदीब ने इसे 'मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को जब्त करने का प्रयास' करार दिया और कहा कि यह एक "काला कानून" है। ऐसे में लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ बिल के पास होने के बाद AIMPLB इसे कोर्ट में चुनौती देने और सड़कों पर विरोध करने की तैयारी में जुट गया है।

Waqf Bill: वक्फ विधेयक का विरोध क्यों?
धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरा: AIMPLB का मानना है कि यह विधेयक अनुच्छेद 14, 25 और 26 के खिलाफ है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और समानता की गारंटी देता है।
वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता समाप्त होगी: विधेयक में गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
संपत्तियों के जब्तीकरण की आशंका: यह विधेयक सरकारी संस्थाओं को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण देने का अधिकार देता है, जिससे मुस्लिम धार्मिक और धर्मार्थ संपत्तियां संकट में आ सकती हैं।
लोकसभा में बिल को पेश कर दिया गया है, जिसके बाद अगले दिन यानी 3 अप्रैल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। ऐसे में अगर बिल पास होता है तो AIMPLB का अगला कदम क्या होगा?
Waqf Bill: कोर्ट में चुनौती, देशव्यापी प्रदर्शन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) विधेयक को संविधान विरोधी बताते हुए इसे कानूनी रूप से चुनौती देगा। इसी के साथ किसान आंदोलन की तर्ज पर सड़कों पर उतरने और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई है। AIMPLB के नेता स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने देश के सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि यदि आज संसद में विवादास्पद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो जाता है तो वे सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें और तब तक विरोध करें जब तक यह विधेयक वापस नहीं ले लिया जाता।
विरोध के बीच क्या कहती है केंद्र सरकार?
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना और उनके बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। हालांकि, मुस्लिम संगठनों को आशंका है कि यह कानून उनकी धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है।












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