कौन हैं AI की पायलट कैप्टन जोया अग्रवाल, जो बनीं UN में महिला प्रवक्ता?
नई दिल्ली, 13 अगस्त। एयर इंडिया की महिला पायलट कैप्टन जोया अग्रवाल संयुक्त राष्ट्र में भारत का मान बढ़ाने जा रही हैं क्योंकि जनरेशन इक्विटी के तहत उन्हें संयुक्त राष्ट्र में महिला प्रवक्ता के लिए चुना गया है। इंडिया की इस होनहार बेटी ने ANI से बात करते हुए अपनी खुशी जाहिर की है। जोया ने कहा कि 'UN जैसे मंच पर अपने देश और एयर इंडिया के ध्वजवाहक का प्रतिनिधित्व करने का मुझे मौके मिला यह मेरे लिए बहुत गौरव की बात है। '
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कौन हैं जोया अग्रवाल?
- एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट और कमांडर जोया अग्रवाल 8 साल की उम्र में ही फैसला कर लिया था कि एक दिन वो आसमानों में उड़ेंगी।
- 2006 में, द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अग्रवाल को भारत की उभरती हुई महिला एविएटर के रूप में संबोधित किया था।
- बुलंद हौसलों वाली जोया अख्तर एक सीनयर पायलट हैं और बतौर कमांडर बी-777 हवाई जहाज उड़ाने का उनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है।
- साल 2013 में बोइंग-777 उड़ाने वाली भारत की सबसे कम उम्र की महिला पायलट बनीं थीं।

यात्री की जान बचाने के लिए की थी इमरजेंसी लैंडिग
वो साल 2015 नें मीडिया में चर्चा में तब आई जब न्यूयॉर्क जाने वाली उड़ान में एक यात्री की जान बचाने के लिए उन्होंने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैडिंग की। यात्री को सांस फूलने की शिकायत हुई थी, जिसके बाद जोया ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैडिंज ली और वहां से यात्री को अस्पताल ले जाया गया और उसकी जांच बच गई। इस बात के लिए जोया कई दिनों तक मीडिया में छाई रहीं थीं।

'वंदे भारत मिशन'
COVID-19 महामारी के दौरान , भारत सरकार ने मई 2020 में एयर इंडिया की 64 उड़ानों में 12 देशों से लगभग 14,800 भारतीयों को इंडिया वापस लाने के लिए 'वंदे भारत मिशन' की शुरुआत हुई थी, तब जोया अग्रवाल को एयरलाइन द्वारा पहली प्रत्यावर्तन उड़ान के सह-पायलट के लिए चुना गया था।

जनवरी 2021 में रचा इतिहास
- जनवरी 2021 में जोया ने एयर इंडिया की महिला टीम के साथ भारत के लिए सबसे लंबी नॉन-स्टॉप कामर्शियल फ्लाइट उड़ाकर नया इतिहास लिखा था।
- इस वक्त सैन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु की फ्लाइट की कमान जोया अग्रवाल के ही हाथ में हैं।
'सपने देखिए और उसे पूरा करने के लिए मेहनत कीजिए'
अपनी सफलता पर जोया ने कहा कि मैं जिस जगह से आती हूं, वहां पर स्पेशली महिलाओं-लड़कियों को सपने देखने का अधिकार नहीं है लेकिन मैंने फिर भी ख्वाब देखे और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत भी की इसलिए हर महिला को सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए खुद पर भरोसा होना चाहिए, जब ऐसा होता है तो सफलता मिलकर ही रहती है।












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