किसान आंदोलन: कृषि मंत्री ने फिर की बातचीत की पहल, बोले-उनके प्रस्ताव पर वार्ता के लिए तैयार

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 16वां दिन है। सरकार से बात नहीं बनते देख किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। सरकार की ओर से आए प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया है। प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, हमें अभी तक उनसे बातचीत का प्रस्‍ताव नहीं मिला है। उनका प्रस्‍ताव आते ही हम बातचीत के लिए तैयार हैं।

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      Agriculture Minister NS Tomar says We are ready to talk as soon as we receive a proposal from them

      शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, हमारा प्रस्‍ताव उनके (किसानों) पास है, उन्‍होंने इसपर चर्चा की लेकिन हमें अबतक उनका जवाब नहीं मिला है। मीडिया से पता चला कि प्रस्‍ताव खारिज कर दिया है। कल उन्‍होंने कहा था कि अगर वे चाहते हैं तो हम जरूर प्रस्‍ताव पर बात कर सकते हैं। हमें अभी तक उनसे बातचीत का प्रस्‍ताव नहीं मिला है। उनका प्रस्‍ताव आते ही हम बातचीत के लिए तैयार हैं।

      कृषि मंत्री ने आगे कहा कि, मुझे लगता है कि हल निकल आएगा। मैं किसान यूनियनों से आग्रह करता हूं कि वे गतिरोध खत्‍म करें। सरकार ने उन्हें एक प्रस्‍ताव भेजा है। अगर किसी प्रावधान पर आपत्ति थी तो उसपर चर्चा हुई। हमारे प्रस्‍ताव में, हमने उनकी आपत्तियों के हल सुझाने की कोशिश की है। उन्‍हें आंदोलन छोड़कर बातचीत का रास्‍ता अपनाना चाहिए। सरकार बातचीत को तैयार है।

      उन्होंने कहा कि, सरकार ने काफी विचार करने के बाद कानून बनाए हैं ताकि किसानों के जीवन में बदलाव आ सके, सालों से जो उनके साथ अन्‍याय हो रहा था उसे दूर किया जा सके। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि किसानों की जिंदगी बेहतर हो और वे फायदे वाली खेती कर सकें। हम मानते हैं कि हम ओवररूल करने वाली ताकत नहीं हैं और यूनियनों के मन में भी कुछ होगा। इसलिए सरकार बातचीत के बाद कानूनों में सुधार को तैयार है।

      उन्होंने कहा कि, आंदोलन से आम लोगों को भी परेशानी होती है। दिल्ली के लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए, उन्हें (किसानों को) आम लोगों के हित में अपना आंदोलन समाप्त करना चाहिए और वार्ता की मदद से मुद्दों को हल करने का प्रयास करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर सरकार से बात नहीं बनते देख किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। वे अब देशभर में ट्रेनें रोकने का ऐलान कर चुके हैं। उधर, पंजाब के अलग-अलग इलाकों से 30 हजार और किसान दिल्ली आ रहे हैं। किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि कानून रद्द करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए जल्द ट्रेनें रोकने की तारीख का ऐलान करेंगे।

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