Agniveer Scheme: अग्निपथ योजना से मुंह मोड़ने में किसकी भलाई है? हकीकत समझिए
Agniveer politics and reality: अग्निपथ योजना के लॉन्च किए हुए दो साल से ज्यादा गुजर चुके हैं, लेकिन इसपर राजनीति खत्म नहीं हो रही है। लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने इसे खत्म करने का वादा किया था, लेकिन फिर भी विपक्ष की दाल नहीं गल पाई। लेकिन, विपक्ष ने इसको लेकर अपना हंगामा बंद नहीं किया है।
अग्निपथ योजना की शुरुआत से विपक्ष इसे पूरी तरह से खत्म करने की मांग पर अड़ा है। लेकिन, हकीकत समझें तो अग्निवीर योजना देश की सुरक्षा से जुड़ी है। इसलिए इसे किसी की पसंद और नापसंद के तराजू पर तोलने में समझदारी नहीं है। यह मसला कतई राजनीतिक नहीं हो सकता।

रक्षा क्षेत्र में बजट का बढ़ता ग्राफ
साल 2024-25 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र को 6.22 लाख करोड़ रुपए का बजट दिया है। यह कुल बजट का करीब 12.90% है और पिछले वित्त वर्ष से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष में मोदी सरकर ने रक्षा क्षेत्र के लिए 5.93 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए थे।
यह अबतक का सबसे ज्यादा बजट था। लेकिन, आंखें खोलने वाली बात ये थी कि इसमें से 1.38 करोड़ रुपए सिर्फ पेंशन पर आवंटित किए गए थे।
बड़े सुधारों की ओर बढ़ता रक्षा क्षेत्र
अगर हम सिर्फ पिछले पांच वर्षों की बात करें तो देश में रक्षा क्षेत्र में कायापलट टाइप सुधार किए गए हैं और देश की सशस्त्र सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई काम हो रहा है। मसलन, थियेटर कमांड बनाने का फैसला, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों का निगमीकरण, घरेलू निर्माण और रक्षा निर्यात को प्रोत्साहन, कुछ आयातों पर प्रतिबंध लगाना सुधारों की दिशा में बड़े कदम हैं।
जाहिर है कि इस दिशा में आगे बढ़ते रहने के लिए और देश को दुनिया के मुकाबले तैयार रखने के लिए जरूरी है कि बजट का ज्यादातर हिस्सा आत्मनिर्भर बनने और इसकी उत्पादकता बढ़ाने पर खर्च होना चाहिए। यह देश की सुरक्षा का विषय है और इसपर होने वाली हर राजनीति से देश को नुकसान हो सकता है।
अग्निवीर और अमेरिका और यूके की सेना में व्यवस्था
जहां तक अग्निपथ योजना की बात है तो यह रक्षा सुधार की दिशा में आजादी के बाद प्रवर्तनकारी प्रभाव डालने वाला एक बहुत ही साहसिक रक्षा सुधार माना जा सकता है। लेकिन, इसकी सबसे ज्यादा आलोचना इस बात को लेकर होती है कि सिर्फ चार साल में ही अग्निवीरों की सेवा समाप्त हो जाती है। तथ्य यह है कि अमेरिका और यूनाइटेड किंग्डम जैसे देशों में दो से छह साल के अंदर ही ऐसे जवानों की सेवा खत्म करने का प्रावधान है।
रक्षा व्यय के बेहतर इस्तेमाल के साथ नौजवानों की फौज
आज की हकीकत ये है कि देश की सुरक्षा के लिए चीन बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। ऐसे समय में अग्निपथ योजना हमारी सेना की गुणवत्ता से समझौता किए बिना रक्षा व्यय के बेहतर से बेहतर उपयोग के लिए एक नई खोज की तरह है। सिर्फ 17.5 से 21 साल के युवाओं की इसमें भर्ती और उनमें से 25% को सशस्त्र सेना में शामिल करने से भारतीय जवानों की औसत कम होगी, जिससे हमारी सेना हमेशा जवान रहेगी। बहुत सारे देशों की सेना इसी तरह की व्यवस्था पर आधारित है।
भारत में अग्निवीर योजना के आलोचकों की यही रट है कि 75% अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद 10.5 लाख रुपए के एकमुश्त पैकेज के साथ छुट्टी कर दी जाएगी और उन्हें कोई पेंशन नहीं मिलेगा। क्योंकि, पुरानी व्यवस्था में 15 से 20 साल सेना में सेवा देने के बाद जीवन भर पेंशन की व्यवस्था है। एक तथ्य यह भी है कि देश की सेना में भर्ती एक सामान्य रोजगार योजना की तरह नहीं हो सकती है। क्योंकि, यह सीधे-सीधे देश की सुरक्षा का मुद्दा है।
अग्निवीरों के लिए क्या कर सकती है सरकार?
अग्निवीरों की ट्रेनिंग सशस्त्र सेना की तरह होती है। ऐसे में अग्निवीर के तौर पर चार साल की सेवा समाप्त होने पर अन्य 75% अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के लिए द्वार खोले जा सकते हैं। अच्छी बात ये है कि कई अर्द्धसैनिक बलों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू भी कर दिए हैं।
अग्निवीरों के लिए इन क्षेत्रों में भी व्यवस्था करवा सकती है सरकार
सरकार चाहे तो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अग्निवीरों के लिए कुछ भर्तियां आरक्षित भी कर सकती है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र में रक्षा से जुड़ी जो इकाइयां हैं, वहां भी अग्निवीरों के लिए रोजगार की असीम संभावनाएं उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। यही नहीं चार साल तक देश की सेवा करने के बाद जो अग्निवीर आगे पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था, उनके आगे के जीवन की राह को आसान बना सकता है।
निजी क्षेत्र भी कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के तहत अग्निवीरों को रोजगार दे सकता है और कई बड़ी कंपनियों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू भी कर दिए हैं। वहीं जो अग्निवीर अपना उद्यम चलाना चाहते हैं, उन्हें आसान शर्तों पर मुद्रा लोन उपलब्ध करवाया जा सकता है।
अगर सरकार अग्निवीरों को चार साल के बाद के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग देने में सफल रही तो इसके खिलाफ तैयार हुआ माहौल सकारात्मक हो सकता है। इसलिए, अगर यह योजना देश की रक्षा चुनौतियों से निपटने और उसके लिए देश के राजस्व को सूझबूझ के साथ खर्च करने के इरादे के साथ बनाई गई है तो इसे सिर्फ राजनीतिक वजहों से वापस लेने की नौबत आ जाए, ऐसी परिस्थिति में सिर्फ देश को ही नुकसान है।
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