लोकसभा में बंपर जीत के बाद अब 'मिशन राज्यसभा' में जुटी BJP, पिछली बार लटके थे कई बिल

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के लिए अगला मिशन राज्यसभा है। संसद के उपरी सदन में भाजपा और उसके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अल्पमत की स्थिति से उबरने की कोशिश करेगा। क्योंकि एनडीए की पिछली सरकार में ऐसा देखने को मिला कि राज्यसभा में अल्पमत होने की वजह से कुछ कानूनों को अमल में लाने में असफल रही।

राज्यसभा में बहुमत के बाद कम हो जाएगी सरकार की मुश्किलें

राज्यसभा में बहुमत के बाद कम हो जाएगी सरकार की मुश्किलें

ऐसे में अगर राज्यसभा में भी एनडीए बहुमत के आंकड़े तक पहुंच जाती है तो उसने किसी भी कानून या विधेयक को पारित कराने में आसानी होगी। क्योंकि मोदी सरकार के लिए पिछले कुछ सालों में ये बड़ी बाधा साबित हुआ है। चाहे वो ट्रिपल तलाक का मुद्दा हो या फिर मोटर वाहन अधिनियम या नागरिकता अधिनियम में संशोधन के लिए लाया गया बिल हो जिसे राज्यसभा में पारित नहीं किया गया क्योंकि एनडीए के पास अपेक्षित संख्याबल नहीं था।

कैसे होता है राज्यसभा के सदस्यों का चयन?

कैसे होता है राज्यसभा के सदस्यों का चयन?

दरअसल लोकसभा में जो सांसद पहुंचते हैं उनको जनता चुनती है जबकि उच्च सदन के सदस्य राज्य के विधायकों द्वारा चुने जाते हैं। इसको इस तरह से समझ सकते हैं कि राज्य में जिस पार्टी के पास सबसे ज्यादा विधायक होते हैं, उतने अधिक सांसदों को उपरी सदन में भेजने की संभावनाएं होती है। एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल छह साल का होता है। जबकि लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल पांच साल का होता है और सब पांच साल में होने वाले चुनाव में चुने जाते हैं। लेकिन राज्यसभा के सभी सदस्यों को एक ही समय में नहीं चुना जाता है।

फिलहाल एनडीए के 101 सदस्य मौजूद है

फिलहाल एनडीए के 101 सदस्य मौजूद है

उपरी सदन में पिछले साल बीजेपी ने इतिहास में पहली बार कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया। 245 सदस्यों वाले राज्यसभा में एनडीए के कुल 101 सदस्य है। इसमें तीन नामित सदस्य स्वपन दासगुप्ता, मैरी कॉम और नरेंद्र जाधव और कम तीन स्वतंत्र सांसदों का समर्थन प्राप्त है जो कुल मिलाकर 107 हुए हैं। यूपीए की ओर से राज्यसभा भेजे गए केटीएस तुलसी भी अलगे साल की शुरुआत में सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में एनडीए के पास मौका रहेगा कि वो अपनी पसंद का नॉमिनी नियक्त कर सकता है। नवंबर 2020 तक, एनडीए सरकार उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित 14 राज्यों में से 19 अन्य सीटों को सुरक्षित कर लेगी, जिससे उसे 123, आधे से आगे निगलने में मदद मिलेगा। ऐसा 15 साल में पहली बार होगा जब कोई सरकार लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत में रहेगी।

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