सनातन धर्म के बाद DMK को 'विश्वकर्मा योजना' और 'चंद्रयान-3' को लेकर क्या है आपत्ति? जानिए
Parliament Special Session: तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अभी सनातन धर्म पर उसके नेताओं और मंत्रियों की ओर से विवादित बयानों की वजह से चर्चा में है। अब पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा ने मोदी सरकार की विश्वकर्मा योजना और चंद्रयान-3 मिशन को लेकर भी कुछ आपत्तियां जाहिर की हैं।
डीएमके सांसद को लगता है कि केंद्र सरकार चंद्रयान-3 की सफलता को 'अवैज्ञानिक रंग' देने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक इसके बजाए सरकार को भारत के बढ़ते वैज्ञानिक शक्ति को समाज के बीच में ले जाना चाहिए।

'अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत सुपरपावर में शामिल'
संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में गुरुवार को चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि जिस ब्रह्मांड और आकाशगंगा को 1950 तक पहेली समझा जाता था, उस क्षेत्र में भारत दुनिया के चार सुपरपावरों में शामिल हो गया है, जिसमें अमेरिका, रूस और चीन हैं।
चंद्रयान को कोई अवैज्ञानिक रंग न दे सरकार-डीएमके
उन्होंने दावा किया कि,'चंद्रयान के सही कक्षा में स्थापित होने से पौराणिक भ्रम दूर हो गया है और यही द्रविड़ अवधारणा की कामयाबी है।' उन्होंने वैज्ञानिकता पर जोर देते हुए कहा, 'मेरा सरकार से अनुरोध है कि चंद्रयान को कोई अवैज्ञानिक रंग न दे। अमेरिका, सोवियत संघ, चीन ने ऐसा नहीं करता है। कृप्या चंद्रयान-3 के लिए विक्रम साराभाई का नाम रखें।'
मोदी सरकार पर लगाया विरोधाभासी विचार का आरोप
यही नहीं राजा ने चंद्रयान-3 की सफलता और पिछले 17 सितंबर से शुरू हुई 'विश्वकर्मा योजना' को लेकर भी मोदी सरकार को विरोधाभासी साबित करने की कोशिश की है। डीएमके नेता ने कहा, 'मुझे लगता है कि एक तरफ आप चंद्रयान को अंतरिक्ष में भेज रहे हैं और आपका दिल और दिमाग कहीं और है। यह विरोधाभास है....एक तरफ प्रधानमंत्री चंद्रयान-3 के लिए उल्लास से भरे थे और दूसरी तरफ वह विश्वकर्मा योजना को लॉन्च करके बहुत गौरवांवित थे।'
विश्वकर्मा योजना की आलोचना के लिए उसे 'सनातन' से जोड़ा
डीएमके नेता के मुताबिक पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक शिल्प कौशल में जुड़े लोगों को जैसे कि नाई और सुनारों को उन्हीं पेशों में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करती है। लेकिन, राजा के बयान पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आपत्ति की और कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी को अपनी पसंद के धर्म के पालन करने की अनुमति देता और कोई भी व्यक्ति उसकी धार्मिक आस्था पर सवाल नहीं उठा सकता।
अपनी टिप्पणियों के प्रति सतर्क रहें राजा- आसन
उन्होंने आरोप लगाया 'लेकिन वे (राजा) हम पर हमला कर रहे हैं। हम सनातन धर्म को मानते हैं और हम हिंदू हैं और हमपर अटैक करने का आपको कोई अधिकार नहीं है।' इसपर आसन पर मौजूद राजेंद्र अग्रवाल ने भी डीएमके नेता को टोका और उनसे कहा कि अपनी टिप्पणियों के प्रति सतर्क रहें। वो बोले, 'कई बार पौराणिक कथा और इतिहास मिले होते हैं। उन्हें पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है। हमारे देश में पुराणों के माध्यम से इतिहास बताने की परंपरा रही है।'
सनातन धर्म को लेकर लगातार आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं डीएमके के नेता
गौरतलब है कि ए राजा डीएमके के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में सनातन धर्म को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने डीएमके के मंत्री उदयनिधि मारन के विवादित बयान पर उनका बचाव करते हुए कहा था कि वह तो सनातन को लेकर नरम थे। यह तो एचआईवी और कुष्ट रोग की तरह है। उसके बाद एक और वीडियो में कथित तौर पर वे ये कहते सुने गए कि हिंदू धर्म पूरे विश्व के लिए खतरा बन चुका है।
इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने शुरू की थी, जिन्होंने सनातन धर्म को डेंगू और मलेरिया की तरह बताते हुए इसे मिटा देने का आह्वान किया था और बार-बार अपने बयान पर कायम रहे हैं।












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