राहुल गांधी के बाद संजय राउत पर लटक सकती है अयोग्यता की तलवार, राज्यसभा से होगी छुट्टी ?
विपक्षी नेताओं के दिन ठीक नहीं चल रहे हैं। राहुल गांधी अपनी ही वजह से लोकसभा से अयोग्य ठहराए जा चुके हैं और अब शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत की सदस्यता भी खतरे में पड़ गई है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी आपराधिक मानहानि के अपराध में अपनी लोकसभा की सदस्यता गंवा चुके हैं। अब उनके नए-नए दोस्त बने उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूटीबी) के नेता संजय राउत की राज्यसभा सदस्यता पर तलवार लटक गई है। मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि उनके खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पारित किया है, जिसपर अब राज्यसभा के सभापति जदगीप धनकड़ को फैसला लेना है। संजय राउत ने विधानसभा के सदस्यों को चोरों की मंडली कह दिया था, जिसपर उनका सियासी दांव फिलहाल उलटा पड़ता नजर आ रहा है।

संजय राउत की राज्यसभा सदस्यता पर भी खतरा
राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने के बाद विपक्षी खेमे की राजनीति में तूफान खड़ा हो चुका है। लेकिन, इसी दौरान उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूटीबी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत पर भी सियासी मुसीबत का पहाड़ टूटने की आशंका पैदा हो गई है। उनके खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा से विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पास हो गया है। विधानसभा ने आगे की कार्रवाई के लिए अपने फैसले से शनिवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ को अवगत करा दिया है। गौरतलब है कि राहुल के नए-नए सियासी दोस्त और उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत अभी राज्यसभा के ही सांसद हैं।

संजय राउत पर क्या है आरोप ?
दरअसल, उद्धव की पार्टी के बड़बोले नेता संजय राउत पर आरोप था कि उन्होंने विधानसभा के सदस्यों को 'चोरों की मंडली' कहा। महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टियों ने राउत के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी और चुने हुए प्रतिनिधियों और सदन के अपमान के लिए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की मांग की थी। महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने विशेषाधिकार समिति की जो रिपोर्ट पढ़कर सुनाया है, उसमें राउत के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। नार्वेकर ने कहा है कि उन्होंने संजय राउत के खिलाफ दायर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

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राउत ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया- विधानसभा स्पीकर
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने कहा, 'हमने प्राकृतिक न्याय के मुताबिक संजय राउत को उनके स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। उन्होंने और ज्यादा समय मांगा और उन्हें ज्यादा समय दिया गया और बाद में उन्होंने जवाब भी दिया, लेकिन वह संतोषजनक नहीं था। इसलिए उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पारित करने का फैसला लिया गया।' संजय राउत राज्यसभा के सदस्य हैं, इसलिए उन्होंने इस पारित प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति को आगे की कार्रवाई के लिए भेजना तय किया है।

राज्यसभा से अयोग्य ठहराने की साजिश- राउत
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से पारित इस प्रस्ताव पर राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए यह आरोप लगाया है कि उन्हें भी राज्यसभा से अयोग्य ठहराने की साजिश रची गई है, जैसे कि राहुल गांधी को अयोग्य करार दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह दावा भी किया है कि वह ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। बड़ी सियासी मुश्किल सामने देख राउत ने अपने बचाव में कहा है कि चुने हुए सदस्यों के लिए चोर मंडली वाले बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। वह अब सफाई दे रहे हैं कि 'मेरे कहने का यह मतलब नहीं था कि राज्य विधानसभा चोरों की मंडली है। बल्कि, यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के उन 40 एमएलए के लिए था, जिन्होंने उद्धव ठाकरे के पिता द्वारा स्थापित पार्टी और परंपरागत धनुष और तीर का निशान छीन लिया है। वो एक चोर गैंग है जो उद्धव ठाकरे से चोरी कर रहा है, इसलिए मेरी टिप्पणी शिंदे ग्रुप के सिर्फ उन 40 एमएलए तक ही सीमित थी। मैं सदन और इसके चुने हुए सदस्यों का अपमान नहीं कर सकता।'

'मैं शिवाजी महाराज का सच्चा सिपाही'
संजय राउत का यह भी दावा है कि वे उस बयान के लिए कभी भी माफी नहीं मांगेंगे जो कभी दिया ही नहीं गया था। वो बोले, 'अगर मैं माफी मांगना चाहता तो मैं जेल भी नहीं गया होता। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज और बालासाहेब ठाकरे का सच्चा सिपाही हूं जो बीजेपी और महाराष्ट्र में इसकी सहयोगियों के ऐसे ओछे दबाव और ब्लैकमेलिंग के दांव-पेच के सामने कभी नहीं झुकेगा। मैं किसी भी कीमत पर अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।'













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