नोटबंदी के बाद 90 फीसदी 500-1000 के नोट बैंकों में हुए जमा, सरकार के फायदे की उम्मीद धुली
देश में आठ नवंबर, 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी तो सबसे ज्यादा इस बात पर जोर दिया था कि इसके जरिए कालेधन पर लगाम लगाई जा सकेगी। टीओआई की स्टोरी के मुताबिक 15.4 लाख क
नई दिल्ली। देश में आठ नवंबर, 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी तो सबसे ज्यादा इस बात पर जोर दिया था कि इसके जरिए कालेधन पर लगाम लगाई जा सकेगी। टीओआई की स्टोरी के मुताबिक 15.4 लाख करोड़ रुपए के बंद हुए 500-1000 रुपए के नोटों में से 14 लाख करोड़ रुपए के बंद हुए नोट बैंक में जमा हो चुके हैं। सरकार को उम्मीद थी कि नोटबंदी के फैसले के चलते सरकार को बहुत फायदा होने वाला है। बताया जा रहा है कि सरकार को उम्मीद थी कि कम से कम 3 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट वापस नहीं आएंगे। अगर यह पूरी तरह से कारगर को जाता तो भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से सरकार को लाभांश दिया जाता। पर अभी तक के प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं है।

टीओआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों में जमा हुए 500-1000 रुपए के नोटों को देखते हुए लग रहा है कि कालेधन को सफेद करने वाले लोगों ने नया रास्ता ढूंढ ही लिया। हां, इस बात पर केंद्र सरकार खुश हो सकती है कि उसे 2.50 लाख से ज्यादा जमा हुए रुपयों पर टैक्स मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही सरकार की नोटबंदी के जरिए कालेधन को नहीं निकाल नहीं पाई हो, पर लोगों की छोटी-छोटी बचतों को बैंकों में जमा करा पाने में सफल ही हुई सरकार को पैसे की कमी से नहीं जूझना होगा और उसे मजबूती मिलेगी। नोटबंदी के फैसले को एक तरफ जहां केंद्र सरकार लंबें समय में देश को होने वाला फायदा बता रही है तो वहीं विपक्ष इसके चलते हुई मौतों के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है। नोटबंदी को कारगर बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार डिजिटल पेमेंट पर फोकस कर रही है और लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा ईनामी योजनाएं ला रही है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अभी तक 60 से ज्यादा नए ऑर्डर जारी कर चुका है।












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