Chandrayaan 2 के बाद अब गगनयान की तैयारी, जानिए क्या है मिशन Gaganyaan
नई दिल्ली। इसरो की महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2(Chandrayaan-2) की सॉफ्ट लैंडिंग फेल होने के बाद देशभर में मायूसी छा गई। हालांकि अभी भी उम्मीदें बची हैं। ऑर्टिबर सुरक्षित हैं। लैंडर विक्रम ने चंद्रमा पर लैंडिंग की है, लेकिन इसरो का संपर्क लैंडर विक्रम से टूट गया है। ऐसे में वैज्ञानिकों की हर संभव कोशिश है कि किसी भी तरह से विक्रम से संपर्क साधा जाए। हालांकि ज्यों ज्यों दिन बीत रहे हैं चंद्रयान 2 को लेकर उम्मीदें खत्म हो रही हैं। इस बीच भारतीय वायुसेना ने गगनयान(Gaganyaan Mission) की तैयारी कर ली है। भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) की महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के पहले चरण की तैयारी पूरी हो चुकी है।

चंद्रयान 2 के बाद गगनयान की तैयारी
भारतीय वायुसेना ने गगनयान को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। पहले चरण की तैयारी पूरी भी हो गई है। गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वायु सेना ने कहा कि टेस्ट पायलटों की गहन शारीरिक जांच, प्रयोगशाला जांच, रेडियोलॉजिकल जांच, क्लीनिकल जांच और मनोवैज्ञानिक के विभिन्न आयामों की जांच की गई। इस प्रारंभिक चयन प्रक्रिया में 25 टेस्ट पायलटों ने हिस्सा लिया। इसके बाद कई और चरण होने हैं।

वायुसेना ने शुरू की गगनयान की तैयारी
वायुसेना ने गगनयान के लिए तैयारी शुरू कर दी है। चयन प्रक्रिया में अभी कई चरण होंगे और सिर्फ 2-3 टेस्ट पायलट ही अंतिम सूची में शामिल हो पाएंगे। चंद्रयान के बाद ISRO के पहले मानव मिशन गगनयान की तैयारी तेजी से जारी है। इस मिशन के जरिए तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में 7 दिन की यात्रा पर भेजा जाएगा। इसरो ने इसके लिए पहले चरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसमें ओडिशा के बलांगीर के विंग कमांडर निखिल रथ को शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है।

क्या है मिशन गगनयान
आपको बता दें, भारतीय वायुसेना ने इस मिशन के लिए शुरुआत में कुल 25 पायलटों का चयन किया था, लेकिन इनमें से पहले चरण में सिर्फ 10 पायलट ही पार कर पाए। गगनयान 2022 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस मिशन में इसरो अंतरिक्ष में 3 भारतीयों को भेजेगा। इसरो और भारतीय वायुसेना इस प्रोजेक्ट में मिलकर काम कर रहे हैं। इस मिशन के लिए वायुसेना अपने पायलटों में से चयन करके 3 अंतरिक्षयात्री इसरो को देगी। जिसके बाद उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। पायलटों की ट्रेनिंग में रूस भी भारत की मदद कर सकता है। गौरतलब है कि 10,000 करोड़ बजट वाले इस मिशन की घोषणा पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान 300 से 400 किलोमीटर के दायरे में पृथ्वी का चक्कर लगाएगा। मिशन के दौरान दो अनमैन्ड और एक मैन्ड मिशन को अंजाम देगा।












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