अफगानिस्तान संकट का जम्मू की ड्राई फ्रूट मार्केट पर पड़ा असर, काजू-बादाम के दाम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नई दिल्ली, अगस्त 19। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे का असर अब भारत भी पड़ना शुरू हो गया है। दरअसल, काबुल पर जब से तालिबानी आतंकियों का कब्जा हुआ है तभी से भारत में ड्राई फ्रूट की मार्केट पर इसका असर दिखने लगा है। खासकर जम्मू की ड्राई फ्रूट मार्केट में अब चीजें काफी महंगी हो गई हैं। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, अफगानिस्तान में आए संकट की वजह से जम्मू में अंजीर, बादाम, पिस्ता और खुबानी की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और ये सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि इन चीजों की सप्लाई पर असर पड़ा है।
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ड्राई फ्रूट की कीमतें छूने लगी आसमान
रिपोर्ट के मुताबिक, पिस्ता की कीमत 600 रुपये प्रति किलो बढ़ी है, जबकि अफगान बादाम और किशमिश की कीमत 350 रुपये प्रति किलो बढ़ी है। अंजीर की कीमतों में 400 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है। व्यापारियों का दावा है कि सूखे मेवे की कीमतों में बढ़ोतरी से उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्हें पिछले हफ्ते से ही ड्राई फ्रूट की बिक्री में गिरावट महसूस होने लगी है।

कस्टमर नहीं समझ रहे हमारी प्रॉब्लम- एक दुकान के मालिक
जम्मू की ड्राई फ्रूट मार्केट में एक दुकान के मालिक का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति के कारण सप्लाई पर असर पड़ा है। इसी वजह से सूखे मेवों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन हमारे ग्राहक हमारी समस्या को समझने के लिए तैयार नहीं हैं। हम त्योहारी सीजन से पहले अपना कारोबार खो रहे हैं।

मार्केट से नदारद हैं ग्राहक
जम्मू की ड्राई फ्रूट मार्केट के एक ग्राहक का कहना है कि वो इस मार्केट से नियमित रूप से मेवे खरीदते हैं। वो यहां से अंजीर खरीदते हैं, क्योंकि वो एक इम्युनिटी बूस्टर है, लेकिन अब सूखे मेवों की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम आदमी के लिए सूखे मेवे खरीदना बहुत मुश्किल हो गया है।

'हालात ऐसे ही रहे तो कीमतें और बढ़ेंगी'
आपको बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान एक ड्राई फ्रूट सेक्टर ही अच्छा पैसा कमाने में सक्षम था, क्योंकि महामारी के दौरान अंजीर जैसा मेवा इम्युनिटी के लिए बहुत अच्छा है और उसकी बिक्री भी खूब हो रही थी, लेकिन अब कीमत बढ़ने की वजह से ग्राहक खरीददारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बिक्री में बहुत गिरावट आ रही है। जम्मू ड्राई फ्रूट रिटेल ट्रेडर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष, ज्योति गुप्ता ने कहा कि अगर अफगानिस्तान में अनिश्चितता बनी रहती है, तो सूखे मेवों की कीमतों में और वृद्धि होगी।
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