एडल्टरी अपराध नहीं, पर तलाक के लिए वाजिब वजह हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट

Recommended Video

    Section 497 Adultery Act को Supreme Court ने किया खत्म, जानें क्या कहता है कानून | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी कानून पर आज अपना फैसला सुनाया। आईपीसी की धारा 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अगस्त में सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाया। फैसला पढ़ते वक्त चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं है। महिला की गरिमा सबसे ऊपर है और उसका अपमान नहीं किया जा सकता है। महिला के सम्मान के खिलाफ आचरण गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 497 महिला और पुरुष में भेदभाव दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 497 असंवैधानिक है।

    adultery Verdict: Section 497 of IPC is unconstitutional: supreme court

    LIVE Feed
    Sep 27, 2018, 11:31 AM IST

    जस्टिस मिश्रा ने कहा, मूलभूत अधिकारों में महिलाओं के अधिकारों को भी शामिल किया जाना चाहिए, एक व्यक्ति का सम्मान समाज की पवित्रता से अधिक जरूरी, महिलाओं को नहीं कहा जा सकता है कि उन्हें समाज के हिसाब से सोचना चाहिए
    Sep 27, 2018, 11:19 AM IST

    अवैध संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पढ़ रहे हैं फैसला, महिला के सम्मान के खिलाफ आचरण गलत
    Sep 27, 2018, 11:19 AM IST

    कोर्ट ने कहा कि महिला-पुरुष के अधिकार समान है, जबकि आईपीसी 497 महिला को पुरुष के अधीन बताता है।
    Sep 27, 2018, 11:18 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति पत्नी को अपने संबंधों में ईमानदार होना जरूरी है।
    Sep 27, 2018, 11:18 AM IST

    आईपीसी की धारा 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह से अलग संबंध बनाना गलत नहीं
    Sep 27, 2018, 11:18 AM IST

    जस्टिस नरीमन ने कहा कि एडल्टरी अपराध नहीं, लेकिन तलाक का आधार हो सकता है, चीन जापान में भी एडल्टरी अपराध नहीं है।
    Sep 27, 2018, 11:18 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ए़डल्टरी अपराध नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार को लेकर धारा 497 को खत्म किया
    Sep 27, 2018, 11:17 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी पर फैसला देते हुए कहा- धारा 497 मनमानी का अधिकार देती है।
    Sep 27, 2018, 11:17 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 497 असंवैधानिक है, आईपीसी की धारा 497 महिला के सम्मान के खिलाफ है
    Sep 27, 2018, 11:17 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट में एडल्टरी कानून पर पढ़ा जा रहा फैसला- पति पत्नी का मालिक नहीं है, महिला की गरिमा सबसे ऊपर है।
    Sep 27, 2018, 11:09 AM IST

    सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी पर फैसला देते हुए कहा- धारा 497 मनमानी का अधिकार देती है।
    Sep 27, 2018, 10:41 AM IST

    एडल्टरी कानून पर सुप्रीम कोर्ट में पढ़ा जा रहा फैसला- पति पत्नी का मालिक नहीं, महिला का सम्मान जरूरी, महिला की गरिमा सबसे ऊपर
    Sep 27, 2018, 9:52 AM IST

    शाइना जोसफ ने आईपीसी की धारा 497 की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि इस कानून के तहत केवल पुरुषों को ही सजा होती है। उनको 5 साल तक की सजा देने का प्रावधान है जबकि महिलाओं पर उकसाने तक का मामला दर्ज नहीं हो सकता है।
    Sep 27, 2018, 9:52 AM IST

    केंद्र की दलीलों पर कोर्ट ने कहा था कि शादी की पवित्रता बनाए रखना पति और पत्नी दोनों की जिम्मेदारी होती है
    Sep 27, 2018, 9:51 AM IST

    केंद्र ने कहा कि धारा 497 को विवाह की पवित्रता की रक्षा करने के लिए बनाया गया था
    Sep 27, 2018, 9:51 AM IST

    इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था- एडल्टरी एक अपराध ही रहना चाहिए, इसे खत्म करने से विवाह की पवित्रता पर असर पड़ेगा।
    Sep 27, 2018, 9:51 AM IST

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये भी कहा था कि अगर विवाहित महिला के पति की सहमति से कोई विवाहित पुरुष संबंध बनाता है तो वह अपराध नहीं है, तो क्या महिला पुरुष की निजी संपत्ति है? जो वो उसके इशारे पर चले

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+