आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की निंदा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय राय के कथित वीडियो के ऑनलाइन सामने आने के बाद हाल ही में विवाद खड़ा हो गया है। राय ने वीडियो को फर्जी और बीजेपी द्वारा एआई-जेनरेटेड बताया है, और कहा कि लखनऊ पहुंचते ही वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राय की टिप्पणियों की आलोचना की, उन्हें कांग्रेस पार्टी की गहरी राजनीतिक संस्कृति का सूचक बताया। एक्स पर एक पोस्ट में, आदित्यनाथ ने टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ऐसी अभद्र और अक्षम्य भाषा कांग्रेस के गहरे मुद्दों को उजागर करती है।
आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेताओं के आचरण पर भी टिप्पणी की, परोक्ष रूप से राहुल गांधी का जिक्र करते हुए। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी हताशा और राजनीतिक पतन की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे उनके लिए जनता से माफी मांगना मुश्किल हो गया है।
बीजेपी नेताओं की निंदा
उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने राय की टिप्पणियों को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और कांग्रेस के भीतर हताश मानसिकता का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे बयान न केवल प्रधानमंत्री का बल्कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों की भावनाओं का भी अपमान करते हैं, जो मोदी को प्रगति और गरिमा का प्रतीक मानते हैं।
चौधरी ने राजनीतिक विमर्श में शिष्टाचार बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, और कांग्रेस नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अधिक सम्मानजनक भाषा अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यक्तिगत अपमान कांग्रेस के राजनीतिक पतन को तेज कर सकता है।
राजनीतिक शिष्टाचार पर बीजेपी का रुख
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी कांग्रेस की भाषा की आलोचना की, और पार्टी पर शिष्टाचार की सभी सीमाएं पार करने का आरोप लगाया। त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि कांग्रेस के भीतर अपमानजनक भाषा का उपयोग करने की आंतरिक प्रतिस्पर्धा है, जिससे पार्टी के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
यह घटना बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रहे तनाव को उजागर करती है, जिसमें दोनों पार्टियाँ राजनीतिक आचरण और भाषा को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं। यह स्थिति भारतीय राजनीति में, विशेष रूप से राष्ट्रीय नेताओं से जुड़े सार्वजनिक विमर्श में, शिष्टाचार के महत्व को रेखांकित करती है।
With inputs from PTI












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