अडानी पोर्ट्स ने कृष्णपट्टनम पोर्ट कंपनी का किया अधिग्रहण, 12000 करोड़ रुपए में हुआ सौदा
नई दिल्ली। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने सोमवार को सीवीआर ग्रुप से कृष्णपट्टनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड (KPCL) में 75 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण 12,000 करोड़ रुपए में अधिग्रहण कर लिया है। हालांकि गत 12 जनवरी को जब अडानी ग्रुप ने KPCL की 75 फीसदी हिस्सेदारी अधिग्रहण के लिए घोषणा की थी, तब कंपनी का एंटरप्राइज वैल्यू पर 13,572 करोड़ रुपए था।


सौदे को गत 3 जनवरी को अडानी ग्रुप द्वारा घोषित किया गया था
गौरतलब है केपीसीएल (KPCL) आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले में कृष्णपट्टम में एक निजी गहरे पानी का बंदरगाह चलाता है। यह सौदा गत 3 जनवरी को अडाणी ग्रुप द्वारा घोषित किया गया था और गत 3 सितंबर को आंध्र प्रदेश कैबिनेट द्वारा इसे मंजूरी दे दी गई थी, जिसे भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग से भी मंजूरी मिल गई है।

इस सौदे के बाद APSEZ की क्षमता 2025 तक 500 MMT हो जाएगी
माना जा रहा है कि इस सौदे के पूरा होने के बाद APSEZ की क्षमता साल 2025 तक 500 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) हो जाएगी। वित्त वर्ष 2020-21 में KPCL का EBITDA (Earing before interst, taxes, depreciation and amortization) करीब 1200 करोड़ रहने का अनुमान है। इस सौदे को लेकर APSEZ के सीईओ करण अडानी ने कहा कि KPCL भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी पोर्ट कंपनी है, जो अब APSEZ का हिस्सा बन गई है।

विश्व स्तरीय उपभोक्ता सुविधा में APSEZ को सक्षम बनाएगा अधिग्रहण
उन्होंने कहा कि यह बदलावकारी अधिग्रहण विश्व स्तरीय उपभोक्ता सुविधा प्रदान करने में APSEZ को सक्षम बनाएगा। बकौल करण अडाणी, धामरा और कट्टुपल्ली बंदरगाहों जैसे अधिग्रहणों को चालू करने का हमारा अनुभव हमें केपीसीएल की क्षमता का दोहन करने में सक्षम करेगा। हम केपीसीएल में अपने परिचालन और रखरखाव के धऱोहर को दोहराएंगे, पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे, उत्सर्जन के स्तर को कम करेंगे और घातकताओं के लिए शून्य सहिष्णुता रखेंगे और इस तरह हितधारकों में वापसी में सुधार करेंगे।

इस अधिग्रहण से 2025 तक 50 करोड़ टन हैंडलिंग क्षमता उत्पन्न होगी
आंध्र प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक मल्टी कार्गो फैसिलिटी कंपनी केपीसीएल समुद्र तट इलाके के क्षेत्रफल के लिहाज से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। माना जा रहा है कि इस अधिग्रहण से 2025 तक 50 करोड़ टन हैंडलिंग क्षमता उत्पन्न होगी। एपीएसईजेड को उम्मीद है कि इस अधिग्रहण के साथ उसकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020-21 में 21 प्रतिशत से बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगी।

भारत के बंदरगाह क्षेत्र में APSEZ का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण है
गौरतलब है यह सौदा मूल्य और आकार के मामले में भारत के बंदरगाह क्षेत्र में APSEZ का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण है और यह 12-राज्य-स्वामित्व वाले बंदरगाहों के प्रभुत्व वाले उद्योग में पैमाने बनाने में मदद करता है। हालांकि APSEZ के पास 11 रणनीतिक स्थानों पर स्थित पोर्ट्स और टर्मिनल हैं, जो देश की कुल पोर्ट क्षमता का 24 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंपनी केरल के विझीनजम में ट्रांस शिपमेंट और म्यांमार में एक कंटेनर टर्मिनल का भी निर्माण कर रही है।












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