Adani Hindenburg Case: SIT से जांच की मांग को झटका, SEBI को हरी झंडी, SC के फैसले की बड़ी बातें
Adani Hindenburg Case Supreme Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जनवरी, 2024) को हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर अडानी ग्रुप पर लगाए गए आरोपों की जांच मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से लेकर स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपने से इनकार कर दिया है।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेबी के नियामक क्षेत्राधिकार में प्रवेश करने की अदालत की शक्ति 'सीमित' है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच यह फैसला सुनाया है।

सेबी की जांच पर
सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने अपने आदेश में कहा है, 'सेबी ने 22 मामलों में से 20 की जांच पूरी कर ली है। सॉलिसिटर जनरल के आश्वासन के मद्देनजर, हम सेबी को बाकी 2 मामलों में 3 महीने के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश देते हैं।'
हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर
सर्वोच्च अदालत ने वैधानिक नियामक (statutory regulator-SEBI) पर सवाल उठाने के लिए न्यूजपेपर की रिपोर्ट और किसी अन्य संगठन (third party organisation) पर निर्भरता पर संदेह जताया है।
अदालत ने उन्हें सेबी की जांच पर सवाल उठाने के लिए निर्णायक सबूत (conclusive proof) के बजाय इनपुट की तरह माना।
सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि सेबी जांच पर संदेह करने के लिए ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीपीआर) की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेबी की ओर से एफपीआई (FPI) और एलओडीआर (LODR) नियमों पर संशोधनों को खारिज करने की मांग को भी ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि ये नियम किसी भी दोष से मुक्त थे।
मार्केट रेगुलेटर सेबी को यह जांच करने का भी आदेश दिया गया था कि क्या शॉर्ट-सेलिंग पर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट कानून का उल्लंघन है, जिससे निवेशकों के हितों को नुकसान हुआ है।
जांच को ट्रांसफर करने पर
सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर दिया कि जांच ट्रांसफर करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत ही असाधारण परिस्थितियों में ही होना चाहिए, जिसके लिए ठोस औचित्य आवश्यक है।
हितों के टकराव के टकराव के आरोपों पर
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति के सदस्यों के खिलाफ हितों के टकराव के आरोपों को सर्वोच्च अदालत ने निराधार, अप्रमाणित और आदी (addicted) मानते हुए खारिज कर दिया है।
निवेशकों के नुकसान पर
सेबी और केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां इस बात की जांच करेंगी कि हिंडनबर्ग रिसर्च या किसी अन्य संस्था की वजह से भारतीय निवेशकों को कितना नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञ समिति के सुझावों पर
सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार और सेबी को भारतीय निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विचार करना चाहिए था।
जनहित याचिकाओं पर
आखिर में सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात पर जोर डालते हुए निष्कर्ष निकाला कि वैसे जनहित न्यायशास्त्र (public interest jurisprudence) को आम नागरिकों को न्याय तक पहुंच दिलाने के लिए विकसित किया गया था।
लेकिन, पुख्ता रिसर्च की कमी और अप्रमाणित रिपोर्टों पर यकीन करने वाली याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।












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