भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी स्टेन स्वामी का निधन, कई दिनों से थे बीमार
मुंबई, 5 जुलाई: भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी (84) का निधन हो गया। सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। इसी दौरान वकील ने ये जानकारी कोर्ट के साथ साझा की। स्टेन स्वामी को देश का सबसे उम्रदराज आरोपी कहा जाता था। गिरफ्तारी के बाद से ही उनको स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें थीं। जिस वजह से वो कई बार कोर्ट भी गए, लेकिन उनको जमानत नहीं मिली।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वामी पार्किसंस समेत कई बीमारियों से पीड़ित थे। साथ ही पिछली साल उनको कोरोना भी हो गया था। जिस वजह से बीच-बीच में उनकी तबीयत खराब होती रहती थी। अप्रैल के अंत में उनको ज्यादा परेशानी होने लगी, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वामी को होली फैमिली अस्पताल में भर्ती करवाने का आदेश दिया। तब से उनका इलाज जारी था, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बीच में उनको वेंटिलेटर पर भी शिफ्ट कर दिया गया था। कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक 5 जुलाई को अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
आपको बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) को दी गई थी। एजेंसी ने जब हिंसा के सबूत जुटाए तो पता चला कि उन्होंने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एलगार परिषद के कार्यक्रम में विवादित भाषण दिया था। इसी के बाद भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई। जिस वजह से NIA ने उनको आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया। साथ ही उनके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया।
NIA पर लगाए थे आरोप
स्टेन स्वामी की उम्र ज्यादा थी, जिस वजह से वो ठीक से खा-पी नहीं पाते थे। जब वो जेल में बंद थे, तो पार्किसंस रोग का हवाला देते हुए उन्होंने चाय, पानी पीने के लिए स्ट्रा-सिपर कप (बंद कप और पाइप) मांगा था। स्वामी का आरोप था कि सुरक्षा के चलते NIA ने उन्हें वो नहीं दिया। हालांकि बाद में ये मामला कोर्ट पहुंचा और उन्हें मूलभूत सुविधाएं दी गईं।












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