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Abhishek Manu Singhvi:2 राज्यों में सियासी भूचाल के बाद सिंघवी को तीसरे राज्य से कैसे मिली राज्यसभा में एंट्री

Abhishek Manu Singhvi Rajya Sabha MP: कांग्रेस के बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की मनचाही मुराद पूरी हो गई है। उन्हें राज्यसभा में पहुंचाने के लिए कांग्रेस पार्टी फरवरी से ही लगी हुई थी। लेकिन, अब जाकर तेलंगाना से उन्हें उच्च सदन का सदस्य बनने का मौका मिला है।

इससे पहले सिंघवी पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के सदस्य थे। उनका कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो चुका था। आज की तारीख में अभिषेक मनु सिंघवी कांग्रेस ही नहीं, इंडिया ब्लॉक में उसकी सहयोगी पार्टियों से संबंधित भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में भी हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में उनकी पैरवी करते देखे जा रहे हैं।

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बीआरएस सांसद ने दिया इस्तीफा, तब मिला सिंघवी को मौका
सिंघवी इस बार निर्विरोध निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे हैं। लेकिन, उपचुनाव में जीतने की वजह से उनका यह कार्यकाल सिर्फ 9 अप्रैल, 2026 तक ही रहेगा। तेलंगाना की जिस राज्यसभा सीट से सिंघवी को संसद पहुंचने का मौका मिला है, वह पहले पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (BRS) के पास थी।

जुलाई महीने में ही बीआरएस के राज्यसभा सांसद के केशव राव ने अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस ज्वाइन की थी। उन्हीं के इस्तीफे से खाली हुई सीट से अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा पहुंचने का मौका मिला है।

तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस के पास हैं पर्याप्त एमएलए
सिंघवी के खिलाफ बीआरएस और बीजेपी ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था। तमिलनाडु के एक निर्दलीय उम्मीदवार जरूर मैदान में थे, लेकिन उनका पर्चा ही रद्द हो गया, जिससे कांग्रेस नेता के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हुआ। 119 सीटों वाले तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस के 65 एमएलए हैं। सीपीआई के 1 और बीआरएस के 10 एमएलए भी उसे समर्थन दे रहे हैं। इस तरह से उसके पास 76 विधायक हैं।

हिमाचल प्रदेश में सिंघवी की हुई थी शर्मनाक हार
अदालती मामलों में सिंघवी की अहमियत को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने उनका बंगाल वाला कार्यकाल खत्म होने से पहले ही फरवरी में हिमाचल प्रदेश से उन्हें राज्यसभा भेजने की कोशिश की थी। वहां कांग्रेस की सरकार है और पार्टी के 40 विधायकों के दम पर उनकी जीत सुनिश्चित थी।
लेकिन, मतदान के समय कांग्रेस के 6 एमएलए ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दिया और सिंघवी की सुनिश्चित जीत शर्मनाक हार में बदल गई। इस घटना के बाद हिमाचल में ऐसा सियासी भूचाल मचा कि कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ही संकट में आ गई और किसी तरह से गिरते-गिरते बच पायी।

आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को राहत दिलाने में भी रही बड़ी भूमिका
इसके बाद लोकसभा चुनावों का दौर शुरू हुआ। चुनाव अभियान में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिलाने में अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में एड़ी चोटी एक कर दी।

स्वाति मालीवाल पिटाई कांड में भी चर्चा में आए थे सिंघवी
जैसे ही केजरीवाल जेल से छूटकर बाहर आए, उनके आवास पर बहुत बड़ा बवाल हो गया। उनकी आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने सीएम हाऊस के अंदर पिटाई और बदसलूकी का आरोप लगा दिया। 'आप' सांसद ने पिटाई का आरोप मुख्यमंत्री केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार पर लगाया।

बवाल बढ़ा तो सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें वायरल हुईं कि दरअसल मालीवाल पर राज्यसभा से इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा था। दावा किया गया कि केजरीवाल को जमानत दिलवाने के बदले पार्टी सिंघवी को राज्यसभा का सीट ऑफर करना चाहती है।

हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्ट तो नहीं हो सकी, लेकिन जब एक न्यूज एजेंसी ने स्वाति मालीवाल से इसपर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, 'मेरी राज्यसभा की सीट अगर उन्हें चाहिए थी...और वो प्यार से मांगते तो, मैं जान दे देती। एमपी की सीट तो बहुत छोटी सी बात है। लेकिन मुझे जिस तरह से मारा गया है, पूरी दुनिया की ताकत लग जाए, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी।'

रिहाई दिलाने पर सिसोदिया ने सिंघवी को अपने लिए बताया भगवान का रूप
इसी अगस्त महीने में सिंघवी ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी के बड़े नेत मनीष सिसोदिया को भी शराब घोटाले में जेल से निकलवाने में अपने कानूनी कौशल का भरपूर इस्तेमाल किया। जेल से आने के बाद सिसोदिया उनका धन्यवाद देने के लिए उनके घर तक पहुंचे और सिंघवी को अपने लिए भगवान का रूप तक बता दिया।

दरअसल, विपक्षी दलों के लिए आज खासकर सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी के बहुत बड़े कानूनी हथियार साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि जब उनकी तेलंगाना से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया तो राज्य के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी जीत से तेलंगाना को बहुत फायदा मिलेगा। संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में तेलंगाना को उनकी बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी।

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