'मोदी सरकार के मंत्री ही बोल रहे मणिपुर में विदेशी आतंकी घुस आए, फिर भी पीएम चुप', हिंसा पर बोले संजय सिंह
मणिपुर हिंसा को लेकर आप सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के मंत्री ही कह रहे कि मणिपुर में विदेशी आतंकी घुस आए हैं।
मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर आप सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 90 दिनों से मणिपुर में हो रही हिंसा पर पीएम मोदी का 78 दिन बाद बयान आता है, उसमें भी वो 36 सेकेंड बोलते हैं। मोदी जी खुद को चौकीदार बोलते हैं तो उन्हें मणिपुर पर बोलना चाहिए।
आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बहुत ही खतरनाक बयान दिया है। रामदास अठावले ने कहा कि म्यांमार से विदेशी आतंकी घुस आए हैं और वो मणिपुर में हिंसा कर रहे हैं। इस पर संजय सिंह ने कहा कि क्या हमारा देश इतना असुरक्षित हो गया है कि विदेशी आतंकी हमारे देश में घुस आए हैं और हैरानी की बात है कि पीएम मोदी कुछ बोल नहीं रहे हैं, रक्षा मंत्री चुप हैं।

संजय सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार का एक मंत्री कह रहा है कि मणिपुर में विदेशी आतंकी घटना को अंजाम दे रहे हैं। फिर भी प्रधानमंत्री जी चुप हैं। 90 दिन से हिंसा हो रही है, 78 दिन बाद प्रधानमंत्री अपना मुंह खोलते हैं, 36 सेकेंड के लिए बोलते हैं और उसके बाद उसमें भी राजनीति होती है।
आगे उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री जी के अंदर जरा सी भी संवेदनशीलता है और वो अपने आप को इस देश का चौकीदार कहते हैं तो उनको मणिपुर पर बोलना चाहिए। जो प्रधानमंत्री किसी भी विषय पर डेढ़ घंटे का भाषण दे सकते हैं, वो इस मामले पर सदन के अंदर क्यों नहीं बोल सकते हैं।
मणिपुर में दो महिलाओं के निर्वस्त्र वीडियो वायरल होने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, क्रोध से भरा है। मणिपुर की जो घटना सामने आई है, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है। पाप करने वाले, गुनाह करने वाले, कितने हैं-कौन हैं, यह अपनी जगह है, लेकिन बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है। सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करता हूं कि वे माताओं-बहनों की रक्षा करने के लिए कठोर से कठोर कदम उठाएं।
बता दें कि मणिपुर में 3 मई से दो आदिवासी समुदाओं मैतेई और कुकी के बीच जातीय झड़प हो गई। मणिपुर में आदिवासियों को लेकर कुछ खास कानून हैं, जिसके तहत वे पहाड़ी इलाकों में रह सकते हैं। वहीं, मैतई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न मिलने के कारण वो पहाड़ी इलाकों में नहीं बस सकते हैं। जिसके लिए मैतई समाज खुद को अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल करवाने की मांग कर रही है।












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