Aam Budget 2024: न्यू टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने के लिए क्या करे सरकार? 5 Tips
Union Budget 2024 Income Tax Regime: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 नई कर व्यवस्था (new tax regime) को लॉन्च करके करदाताओं को परंपरागत कर प्रणाली से निकलने का एक विकल्प दिया था।
लेकिन, भारत में यह व्यवस्था मध्यम आय वर्ग वालों और खासकर नौकरीपेशा लोगों में अभी तक यह उतनी लोकप्रिय नहीं हो पाई है। देश में पिछले चार वित्त वर्षों से दो तरह की टैक्स रिजीम अस्तित्व में है।

आयकरदाताओं के पास दो तरह की टैक्स रिजीम का विकल्प
एक परंपरागत और दूसरी न्यू टैक्स रिजीम। परंपरागत टैक्स व्यवस्था में करदाता तरह-तरह की छूट और कटौती का फायदा उठा सकते हैं। वहीं न्यू टैक्स रिजीम में यह तो नहीं मिलती, लेकिन उन्हें कम टैक्स दरों का लाभ मिलता है।
बजट में न्यू टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने की हो सकती है कोशिश
मौजूदा वित्त वर्ष (FY24) में न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के लिए टैक्स के कम स्लैब, ज्यादा रियायत, स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ और ज्यादा आय वालों को कम सरचार्ज की व्यवस्था शुरू की गई थी। लेकिन, अभी भी कुछ ऐसे उपाय हो सकते हैं, जिससे नई कर व्यस्था और भी लोकप्रिय बनाई जा सकती है।
1- टैक्स स्लैब में बदलाव और छूट
आय पर मूल छूट की सीमा 3 लाख रुपए तक है। लेकिन, नई टैक्स रिजीम में प्रभावी तौर पर 7 लाख रुपए तक की सालाना आय पर व्यक्तिगत करदाताओं को कोई टैक्स नहीं देना होता। सरकार मूल छूट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक कर दे तो यह बहुत बड़ी राहत होगी। वहीं अगर नई टैक्स रिजीम में 10 लाख रुपए तक की सालाना आय पर कोई टैक्स न लगे तो इसकी ओर शिफ्ट करने वाले करदाताओं की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना रहेगी।
2- होम लोन इंटरेस्ट पर कटौती (self occupied property)
कोई व्यक्ति घर खरीदने के लिए पूरे जीवन की योजना के साथ होम लोन लेता है। होम लोन का बहुत बड़ा हिस्सा ब्याज पर चला जाता है। अगर कोई करदाता अपने खरीदे गए घर में रहता है तो नई टैक्स रिजीम के तहत उसे भी होम लोन इंटरेस्ट पर कटौती की सुविधा दी जाए तो वह परंपरागत टैक्स रिजीम से शिफ्ट कर सकता है। अभी इसकी सीमा 2 लाख रुपए है, जिसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने पर विचार किया जा सकता है।
3- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट
आज नौकरीपेशा लोगों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा बन चुका है। मेडिकल सेवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए इसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो चुका है। इसकी वजह से करदाताओं की कमाई का एक बड़ा भाग अब मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर चला जाता है। नई टैक्स रिजीम की ओर करदाताओं को आकर्षित करने के लिए सरकार को इसपर भी विचार करने की जरूरत है।
4- स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी
सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम अभी 50,000 रुपए फिक्स कर रखी है। यह सुविधा न्यू टैक्स रिजीम में भी उपलब्ध है। अगर सरकार वेतनभोगियों के लिए नई टैक्स रिजीम में इसकी सीमा बढ़ाकर 1,00,000 रुपए कर दे तो यह मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है।
क्योंकि, महंगाई की दौर में 1,00,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी कुछ नहीं है। इससे देश के लाखों करदाता लाभांवित हो सकते हैं और नए विकल्प की ओर बढ़ सकते हैं।
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5- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की सुविधा
इस समय पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत कोई व्यक्ति अगर एम्पलॉयर से अलग एनपीएस में अपनी ओर से योगदान देना चाहता है तो वह साल में अधिकतम 50,000 रुपए तक डाल सकता है। इस रकम पर उसे आयकर में राहत मिलती है। उचित होगा कि सरकार नई टैक्स रिजीम अपनाने वाले वेतनभोगियों के लिए भी इस सुविधा पर विचार करे। इससे नेशनल पेंशन सिस्टम में ज्यादा योगदान को भी प्रोत्साहन मिलेगा। (इस आर्टिकल में केंद्र सरकार को सिर्फ कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिसपर फैसला करने का अधिकार उसके पास सुरक्षित है)












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