Aadhar Voter ID से लिंक करने के फैसले को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा

Aadhar Voter ID से लिंक किया जाए या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है। Aadhar Voter ID link case supreme court issues notice centre

Aadhar Voter ID से लिंक करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। आधार कार्ड के साथ वोटर आईडी को लिंक करने का फैसला केंद्र सरकार ले चुकी है, लेकिन इसे देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी गई है।

Aadhar Voter ID

नागरिकों के अधिकार से जुड़ा केस !

बता दें कि निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाला आधार कार्ड देश के नागरिकों के लिए अहम पहचान और पता प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल होता है। ऐसे में दोनों पहचान और पता प्रमाण पत्र को जोड़ने का फैसला नागरिकों पर बड़ा असर डाल सकता है। एक ही आदमी के पास दो वोटर आई़डी की चुनौती से निपटने के लिए आधार और वोटर आईडी को लिंक करना निर्वाचन आयोग बेहतर विकल्प मानता है।

पूर्व मेजर जनरल भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आधार कार्ड और वोटर आईडी लिंक करने वाले फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। जस्टिस संजय किशन कौल और अभय एस ओका की पीठ ने केंद्र से जवाब मांगा। उच्चतम न्यायालय ने मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड लिंक करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के साथ ही पूर्व मेजर जनरल एसजी वोम्बटकेरे द्वारा दायर याचिका को भी टैग किया। वोम्बटकेरे का लंबित मामला भी इसी प्रकृति का है।

ECI की शक्ति को चुनौती !

आधार वोटर आईडी लिंक को चैलेंज करने वाली याचिका में मतदाता सूची में प्रविष्टियों को हटाने और अद्यतन करने की प्रक्रिया में भारत के चुनाव आयोग द्वारा आधार डेटाबेस का उपयोग करने की शक्ति को चुनौती दी गई है।

किन प्रावधानों को दी गई चुनौती

याचिकाकर्ता ने चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 के संवैधानिक अधिकार को चुनौती दी। इसके अलावा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23 और धारा 28 में संशोधन को भी चैलेंज किया है। इसके अलावा मतदाताओं का पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2022 और आधार-वोटर कार्ड लिंकेज के संबंध में दो अधिसूचनाओं को भी चैलेंज किया गया है।

Aadhar Voter ID से लिंक न करने पर दलील

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ से कहा कि मतदान का अधिकार सबसे पवित्र अधिकारों में से एक है और अगर किसी व्यक्ति के पास आधार नहीं है तो इससे उसके वोटिंग राइट प्रभावित नहीं होने चाहिए। मतदाता को वोट करने का मौका देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।

Aadhar के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

दीवान ने तर्क दिया कि आधार अधिनियम 2016 को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, आधार कार्ड का उपयोग केवल लाभ प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा, आधार के कारण इस बात पर जोर नहीं दिया जा सकता है कि कोई नागरिक अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेगा या नहीं।

Aadhar Voter ID से क्यों लिंक हो ?

बता दें कि केंद्र सरकार ने मतदाता सूची के साथ आधार विवरण को जोड़ने की अनुमति देने के लिए मतदाता पंजीकरण नियमों में संशोधन किया था। सरकार का तर्क था कि इससे डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाया जा सकेगा और सर्विस वाले मतदाताओं (आर्म्ड पुलिस फोर्स के सदस्य) के लिए चुनाव कानून लिंग-तटस्थ बनाया जा सकेगा।

खतरे में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता !

याचिकाकर्ता के अनुसार, अधिनियम, नियमों और अधिसूचनाओं के तहत स्वीकृत प्रक्रिया चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा खतरा है। ऐसा इसलिए क्योंकि मतदाता सूची की तैयारी आधार / UIDAI पर निर्भर नहीं करती है। UIDAI का ECI के मतदाता पहचान पत्र समेत प्रक्रियाओं और प्रणालियों पर कोई नियंत्रण नहीं है।

अनिवार्य न बनाया जाए आधार को वोटर कार्ड लिंक करना

Aadhar Voter ID से लिंक न करने की अपील करते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिनियम और नियमों के माध्यम से, भारत का चुनाव आयोग नागरिकों / वोटर्स को अपने आधार नंबर को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए अनिवार्य करना चाहता है, ऐसा करना किसी भी तरह ठीक नहीं।

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