आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासी दलों ने क्या कहा?
नई दिल्ली। आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। जरूरी सेवाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती देने वाली गोपाल सुब्रमण्यम का याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने आधार को पूरी तरह वैध ठहराया। कोर्ट ने सेक्शन 57 को खारिज कर दिया, यानी किसी भी प्राइवेट कंपनी, शिक्षण संस्थान, बैंक, परीक्षा एजेंसियों, मोबाइल कंपनियों की तरफ से आधार नहीं मांगा जाना चाहिए। नया सिम कार्ड प्राप्त करने के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं।

कांग्रेस ने फैसले को बीजेपी के लिए बताया तमाचा
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बीजेपी के चेहरे पर तमाचा बताया है। कांग्रेस की तरफ से ट्वीट किया गया, 'हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार एक्ट के सेक्शन 57 को निरस्त किए जाने के फैसले का स्वागत करते हैं। सत्यापन उद्देश्यों के लिए निजी संस्थाओं को आधार का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।'
सुब्रमण्यम स्वामी फैसले से खुश
बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि आधार अब केवल एक पहचान पत्र है। लोगों में इसे लेकर जो समस्याएं थी वो अब दूर हो गई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला उम्मीद के मुताबिक है।
टीएमसी ने भी फैसले पर खुशी जताई
वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि ममता बनर्जी ने आधार पर बीजेपी को खुली चुनौती दी थी। हमारा स्टैंड सही साबित हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि डेटा गोपनीयता और डेटा सुरक्षा पर हमें ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने आधार पर बीजेपी की नीतियों की आलोचना भी की।

आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनाया है बड़ा फैसला
एक्टिविस्ट उषा रामनाथन ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये त्रासदी है कि अदालत ने गरीबों का कल्याण देखा लेकिन अधिकारों को नहीं।
पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह एक अच्छा फैसला है। हालांकि व्यक्तिगत रूप से, वे न्यायमूर्ति चंद्रचुद के फैसले से खुश हैं कि आधार गोपनीयता के अधिकार में दखल देता है।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वे फैसले से खुश हैं। यह एक ऐतिहासिक और उल्लेखनीय फैसला है।
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