व्हाट्एस मैसेज के चलते 10 लाख का इनामी लश्कर का कमांडर सेना की भेंट चढ़ा

नई दिल्ली। भारतीय सेना और कश्मीर की पुलिस लंबे समय तक इंतजार के बाद भी जब अब्दुल कय्यूम नजर को नहीं पकड़ सकी तो उसने उसका पता बताने वाले को इनाम देने की घोषणा की । नजर हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर हैं और काफी लंबे समय से सेना की पकड़ से दूर है। पाकिस्तान से कश्मीर में नजर की वापसी सेना के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी, लेकिन आखिरकार सेना को बड़ी सफलता मिली और नजर को मार गिराने में सेना को बड़ी सफलता हाथ लगी है।

abdul qayoom nazar

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घाटी में फिर से जिंदा कर सकता था हिजबुल को
सेना ने नजर को उरी में मार गिराया है। लेकिन नजर के बारे में सेना को व्हाट्सएप के एक मैसेज के जरिए जानकारी मिली, जिसके बाद सेना ने नजर की तलाश जारी की। दरअसल नजर हिजबुल का काफी खुंखार कमांडर था और कश्मीर में वापसी करके एक बार फिर से हिजबुल को जिंदा कर सकता था और इसका विस्तार वादी में कर सकता था, जिसकी वजह से उसकी वापसी ने सेना की मुश्किल बढ़ा दी थी।

भेष बदलने में माहिर था नजर
एक खुफिया सूत्र ने आईबी को बताया कि नजर घाटी में लौट रहा है, इसकी तारीख और समय के बारे में उसे जानकारी नहीं थी। जिसके बाद सीमा पर सेना ने हाई अलर्ट जारी कर दिया था। सोमवार को आईबी नजर के बारे में जानकारी हासिल करने में सफलता हासिल की, जिसके बाद सेना ने नजर के ठिकाने की तलाश की और उसे मार गिराया। कश्मीर पुलिस का कहना है कि नजर अपना भेष बदलने में माहिर था, वह अक्सर अपना हुलिया बदल लेता था, जिसकी वजह से वह सुरक्षा एजेंसियों के चंगुल में नहीं आ पाता था। मंगलवार को जब वह सीमा से भारत में आया तो उसने अपना हुलिया नहीं बदला था, जब सुरक्षा एजेंसियों ने उसे घेरा तो उसने जवाबी फायरिंग भी की लेकिन सेना ने उसे मार गिराया।

कई घटनाओं को दिया था अंजाम
आपको बता दें कि नजर (43) हिजबुल से अलग हो गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उसने आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के साथ मिलकर घाटी में काफी अशांति फैलाई थी। सूत्रों की मानें तो वह एक बार फिर से घाटी में लौटकर हिजबुल को मजबूत करना चाहता था। उसे सलाहुद्दीन ने भारत भेजा था। नजर 2015 से पाकिस्तान में था, उसपर कई सुरक्षाकर्मियों को मारने का आरोप है, इसके साथ ही वह मोबाइल टॉवर को गिराने के मामले में भी आऱोपी थी और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। नजर पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, सेना ने उसे A++ कैटेगरी का आतंकी घोषित किया गया था।

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हिजबुल से बाहर कर दिया गया था
हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर नजर ने लश्कर ए इस्लाम का गठन किया था। नजर को सैयद सलाहुद्दीन ने अलग कर दिया था, उसपर निर्दोष लोगों को मारने के आरोप था, जिसके चलते उसे निष्कासित कर दिया गया था। उसपर हुर्रियत के नेताओं के चरित्र हनन का भी आरोप लगा था। कई सालों से कश्मीर में नजर मोस्ट वांटेड आतंकी था, जिसके चलते सेना और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। नजर उस वक्त सेना की लोगों की नजर में आया था जब उसने मोबाइल टॉवर पर हमला किया था और छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सेना उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी।

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