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घाटी में आतंकवाद की सेना ने तोड़ी कमर, दो महीने में 93 आतंकी ढेर

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए सुरक्षाबल लगातार अभियान चला रहे हैं। पिछले छह महीने में सुरक्षाबलों ने 93 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया, जिसमे टॉप कमांडर भी शामिल हैं। आज सुबह यानि 8 जून तक सुरक्षाबलों नेन कुल 93 आतंकियों को मौत के घाट उतारा है। पिछले दो दिनों में 9 आतंकियों को घाटी में सुरक्षाबलों ने ढेर किया है, इस दौरान एक भी जवान शहीद नहीं हुआ है। आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबल के जवान एलओसी और घाटी के भीतर दोनों ही जगह चला रहे हैं। हाल ही में सेना ने जैश ए मोहम्मद के टॉप कमांडर रियाज नायकू, जुनैद सेहराय सहित कई आतंकियों को ढेर कर दिया था।

army

घुसपैठ की कोशिश

पिछले महीने जम्मू कश्मीर के केरन सेक्टर में काउंटर इन्फिल्टरेशन में सेना के एक मेजर शहीद हो गए थे, जबकि पैरा एसफ के पांच जवान भी शहीद हो गए थे। मई माह में हंदवाड़ा में एक और ऑपरेशन में एक कर्नल, तीन सेना के जवान शहीद हो गए थे। सेना के सूत्र का कहना है कि पिछले कुछ ऑपरेशन में सेना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में घाटी में आतंकियों के खिलाफ एनकाउंटर बढ़ सकते हैं जो पीओके में बर्फ पिघलने पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं।

लोग चाहते हैं शांति

इससे पहले कश्मीर में स्थित 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने घाटी की स्थिति को पहले से बेहतर बताया है। जनरल राजू के मुताबिक अब घाटी की आवाम शांति चाहती है। जिस वजह से आतंकी संगठनों को स्थानीय लोगों का सपोर्ट नहीं मिल रहा है। ऐसे में वो बौखला कर जगह-जगह हमले कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर घाटी में हर आपात स्थिति से निपटने में भारतीय सेना को सक्षम बताया। लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मकसद सिर्फ सनसनी पैदा करना है। मौजूदा वक्त में उन्हें कश्मीर की आवाम का ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है। जो आतंकी गतिविधियां हो रही हैं, वो हताशा का संकेत हैं। अब लोग कश्मीर घाटी में हिंसा के चक्र से बाहर निकलना चाहते हैं। हाल ही में उत्तरी कश्मीर में हुई एक मुठभेड़ में भारतीय सेना के कर्नल समेत कई जवान शहीद हुए थे। इस पर जनरल राजू ने कहा कि ये घटना कश्मीर घाटी में बढ़ते आतंकवाद को नहीं दर्शाती है।

युवा आतंकवाद से हो रहे दूर

जनरल राजू के मुताबिक इस साल बहुत ही कम संख्या में युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता चुना है। उन्होंने भर्ती हुए युवाओं की संख्या का खुलासा करने से इनकार कर दिया। इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस के DGP दिलबाग सिंह ने बताया था कि 2018 में 218 और 2019 में 139 युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता चुना था। इस साल का अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं जारी हुआ है। फिलहाल 35 युवक लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में आशंका है कि ये सभी आतंकी संगठनों के साथ जुड़े होंगे। इस पर जनरल राजू ने कहा कि अब कश्मीर घाटी के युवा शांति के रास्ते पर चलना चाहते हैं। उनके लिए खेलकूद, कौशल विकास और रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। कश्मीर घाटी में होने वाली सेना भर्ती रैली के लिए 10 हजार से ज्यादा युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। ये संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुनी है।

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