चौंकाने वाली रिपोर्ट: पिछले 5 साल में हुए 8670 'लोन घोटाले', बैंकों को लगा 612.6 अरब रुपये का चूना
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में 11,500 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद निवेशक चौंक गए। दो दिन लगातार 8,000 करोड़ रुपए की चपत निवेशकों को लगी। घोटाला करने वाले नीरव मोदी, एमी, मेहुल चौकी, निशल मोदी देश छोड़कर फरार हैं। आज केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने PNB के 2 कर्मचारियों सहित 1 अन्य शख्स को गिरफ्तार किया है। इन सबके बीच एक बड़ी रिपोर्ट आई है। समाचार एजेंसी रायटर्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सूचना का अधिकार, 2005 के तहत मांगी गई जानकारियों से मिले जवाब में यह सामने आया है कि बीते 5 वित्तीय वर्षों में देश भर में 8,670 लोन फ्रॉड के मामले है जिसका कुल अमाउंट 612.6 अरब रुपए है। भारत में, लोन फ्रॉड आमतौर पर उन मामलों को माना जाता है है जहां उधार लेने वाला जानबूझकर उधार देने वाले बैंक को धोखा देने की कोशिश करता है और ऋण नहीं चुकाता है।

176.34 अरब रुपये तक पहुंच गया लोन फ्रॉड
रायटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि - ये आंकड़े एक बैंकिंग क्षेत्र में समस्या के भयावह स्थिति खुलासा करते हैं जो उधार देने के खराब तरीकों के बाद दबाव में हैं। बीते साल बैड लोन का आंकड़ा कम से कम 149 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार लोन फ्रॉड जो वित्तीय वर्ष 2012-13 में 63.57 अरब रुपये था वो 2016-17 वित्तीय वर्ष तक 176.34 अरब रुपये तक पहुंच गया। डेटा के अनुसार, जिसमें पीएनबी मामले शामिल नहीं हैं।

पीएनबी का कुल एमाउंट 65.62 अरब रुपए
भारत के दूसरे बड़ा बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने बुधवार को कहा कि एक शाखा में दो जूनियर अधिकारियों ने अवैध रूप से कंपनियों को 1.77 अरब डॉलर का कर्ज दिया है, जिनमें से ज्यादातर कंपनियों के मालिक नीरव मोदी द्वारा नियंत्रित हैं। यह भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला है। रायटर्स के अनुसार बीते 5 सालों में सामने आए कुल 8,670 मामलों में से 389 मामले सिर्फ PNB के हैं। पीएनबी का कुल एमाउंट 65.62 अरब रुपए है।

कितना वसूला किया जा सका?
वहीं दूसरे नंबर पर बैंक आफ बड़ौदा (389 मामले, 44.73 अरब रुपए )और तीसरे नंबर पर बैंक ऑफ इंडिया (231 मामले, 40.5 अरब रुएप) है। हालांकि देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंर ऑफ इंडिया ने कुल राशि बताने से इनकार किया लेकिन इसी वित्तीय वर्ष के इसके कुल 1,069 मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन वर्षों में बैंकों द्वारा कितना वसूला किया जा सका है।












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